अमेरिका के बहुचर्चित और कुख्यात यौन शोषण मामले से जुड़े जेफ्री एपस्टीन प्रकरण में एक बार फिर बड़ा खुलासा हुआ है। अमेरिकी न्याय विभाग ने एपस्टीन से संबंधित जांच फाइलों के लाखों नए दस्तावेज सार्वजनिक कर दिए हैं। इन दस्तावेजों के सामने आने के बाद यह बहस फिर तेज हो गई है कि सरकार को एपस्टीन की आपराधिक गतिविधियों की कितनी जानकारी थी और किन प्रभावशाली राजनीतिक व सामाजिक हस्तियों से उसके संबंध थे।
न्याय विभाग के अनुसार, एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट के तहत 30 लाख से अधिक पन्नों के रिकॉर्ड सार्वजनिक किए गए हैं। डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने बताया कि ये दस्तावेज विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किए गए हैं, ताकि आम जनता भी इन्हें देख सके। इनमें वे फाइलें भी शामिल हैं, जिन्हें दिसंबर में जारी किए गए पहले दस्तावेजी सेट में रोका गया था।
इन रिकॉर्ड्स का मुख्य उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि अमेरिकी सरकार ने एपस्टीन के अपराधों के बारे में क्या जानकारी थी और किस समय तक थी। लंबे समय से यह आरोप लगता रहा है कि प्रभावशाली लोगों से उसके करीबी संबंधों के कारण जांच और कार्रवाई में देरी हुई। नए दस्तावेज इस पूरे घटनाक्रम पर और रोशनी डाल सकते हैं।
हालांकि, तय समय-सीमा के भीतर सभी दस्तावेज जारी नहीं हो पाए थे। कांग्रेस द्वारा 19 दिसंबर तक सभी रिकॉर्ड सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन इसमें देरी हुई। इसके बाद न्याय विभाग ने सैकड़ों वकीलों और विशेषज्ञों की टीम लगाकर दस्तावेजों की गहन समीक्षा कराई। अधिकारियों के अनुसार, अब तक 52 लाख से अधिक दस्तावेज जांच के दायरे में आ चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या में डुप्लीकेट फाइलें भी थीं।
न्याय विभाग ने बताया कि कई दस्तावेजों के हिस्सों को काला किया गया है, ताकि पीड़ितों की पहचान और उनकी निजता की रक्षा की जा सके। इसके बावजूद, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट होता है कि एपस्टीन का नेटवर्क काफी व्यापक और प्रभावशाली था, जिसकी जड़ें राजनीति, उद्योग और वैश्विक अभिजात वर्ग तक फैली हुई थीं।
इससे पहले क्रिसमस से ठीक पहले जारी किए गए दस्तावेजों में भी कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई थीं। उन फाइलों में तस्वीरें, कॉल रिकॉर्ड, इंटरव्यू ट्रांसक्रिप्ट, कोर्ट दस्तावेज और एपस्टीन के निजी विमान के फ्लाइट लॉग शामिल थे। इन फ्लाइट लॉग्स में यह जानकारी सामने आई थी कि मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1990 के दशक में एपस्टीन के विमान में यात्रा की थी।
इसके अलावा पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन से जुड़ी तस्वीरें और संपर्कों का भी जिक्र उन दस्तावेजों में था। हालांकि, ट्रंप और क्लिंटन दोनों ने किसी भी प्रकार के गलत आचरण या नाबालिगों के शोषण से सख्त इनकार किया है। इसके बावजूद, इन नामों के सामने आने से अमेरिकी राजनीति में हलचल मच गई थी।
जेफ्री एपस्टीन को वर्ष 2019 में नाबालिगों की तस्करी और यौन शोषण के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया गया था। लेकिन गिरफ्तारी के महज एक महीने बाद न्यूयॉर्क की जेल में उसकी मौत हो गई, जिसे आधिकारिक तौर पर आत्महत्या बताया गया। उसकी मौत को लेकर भी आज तक कई सवाल और साजिश के आरोप उठते रहे हैं।
इससे पहले 2008-09 में एपस्टीन फ्लोरिडा में इसी तरह के मामलों में अपेक्षाकृत कम सजा के तहत जेल जा चुका था, जिसे लेकर न्याय प्रणाली पर गंभीर सवाल उठे थे। उसकी करीबी सहयोगी और पूर्व प्रेमिका घिसलेन मैक्सवेल को 2021 में नाबालिगों की तस्करी में दोषी ठहराया गया और उसे 20 साल की सजा सुनाई गई।
एपस्टीन की पीड़िताओं में से एक वर्जीनिया रॉबर्ट्स जियुफ्रे ने कई वैश्विक स्तर के प्रभावशाली लोगों पर आरोप लगाए थे, जिनमें ब्रिटेन के राजकुमार प्रिंस एंड्रयू का नाम भी शामिल था। हालांकि एंड्रयू ने आरोपों से इनकार किया, लेकिन बाद में समझौता कर लिया। जियुफ्रे की पिछले वर्ष आत्महत्या से हुई मौत ने इस मामले को और भी रहस्यमय बना दिया। लाखों नए दस्तावेज सामने आने के बावजूद यह सवाल अब भी कायम है कि क्या इस घोटाले से जुड़े सभी दोषियों को कभी न्याय के कठघरे तक लाया जा सकेगा।


