– धूल भरी आंधियों ने अंतरिक्ष में उड़ा दिया जल, नई स्टडी का दावा
टोक्यो/सेन्दाई। कभी पानी से भरपूर रहा मंगल ग्रह आज एक सूखा और ठंडा मरुस्थल क्यों बन गया—इस रहस्य पर वैज्ञानिकों ने नई रोशनी डाली है। ताजा अध्ययन में सामने आया है कि मंगल पर आने वाले धूल भरे तूफान ही इसके पानी के अंतरिक्ष में खो जाने की बड़ी वजह बन सकते हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार अब तक माना जाता था कि केवल बड़े वैश्विक तूफान ही इस प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन नई रिसर्च बताती है कि छोटे और स्थानीय धूल-तूफान भी उतने ही प्रभावी हो सकते हैं।
यह अध्ययन तोहोकू यूनिवर्सिटी समेत अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की टीम ने किया है, जिसमें मंगल के वायुमंडल और जलवाष्प के व्यवहार का गहराई से विश्लेषण किया गया।
शोध के मुताबिक, धूल भरी आंधियां मंगल के निचले वायुमंडल से जलवाष्प को उठाकर ऊपरी परतों तक पहुंचा देती हैं। वहां पहुंचकर यह जलवाष्प टूट जाता है और उससे निकला हाइड्रोजन अंतरिक्ष में निकल जाता है।
यह प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक बार हाइड्रोजन अंतरिक्ष में चला गया तो वह वापस नहीं लौटता। इसका मतलब है कि पानी स्थायी रूप से खत्म होता जाता है।
वैज्ञानिकों ने पाया कि इस तरह की घटनाएं मंगल के उत्तरी गोलार्ध की गर्मियों में ज्यादा होती हैं, जब तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियां इस प्रक्रिया को तेज कर देती हैं।
अध्ययन में खास तौर पर “मार्टियन वर्ष 37” (पृथ्वी के 2022–2023) के दौरान आए एक असामान्य धूल-तूफान का विश्लेषण किया गया। इस दौरान जलवाष्प का स्तर सामान्य से लगभग 10 गुना तक बढ़ गया था।
इतना ही नहीं, ऊपरी वायुमंडल में हाइड्रोजन की मात्रा भी सामान्य से 2.5 गुना अधिक दर्ज की गई, जो इस बात का संकेत है कि पानी तेजी से अंतरिक्ष में निकल रहा था।
यह शोध कई अंतरिक्ष मिशनों के आंकड़ों पर आधारित है, जिनमें नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के मिशन शामिल हैं।
इन मिशनों में मार्स रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर और एक्सोमार्स ट्रेस गैस ऑर्बिटर जैसे यान शामिल हैं, जो लगातार मंगल की कक्षा से डेटा भेज रहे हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि मंगल की सतह पर मौजूद सूखी नदियां, खनिज और अन्य भूगर्भीय संकेत इस बात का प्रमाण हैं कि वहां कभी बड़ी मात्रा में पानी मौजूद था।
लेकिन समय के साथ इन प्रक्रियाओं ने धीरे-धीरे पानी को खत्म कर दिया, जिससे यह ग्रह आज बंजर और निर्जीव दिखाई देता है।
यह नई खोज न सिर्फ मंगल के अतीत को समझने में मदद करती है, बल्कि भविष्य में वहां जीवन की संभावनाओं और मानव मिशनों की योजना बनाने के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


