वॉशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि वह ईरान के नए नेतृत्व के साथ गंभीर बातचीत कर रहा है और समझौते की दिशा में प्रगति हो रही है। हालांकि तेहरान ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।
व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिका ईरान के “सही लोगों” से बातचीत कर रहा है। उनके अनुसार यह वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और जल्द ही किसी नतीजे तक पहुंच सकती है।
अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि मौजूदा हालात में कूटनीतिक समाधान ही सबसे बेहतर रास्ता है। अधिकारी ने यह भी संकेत दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप को इस बातचीत के सफल होने का भरोसा है।
हालांकि साथ ही अमेरिका ने चेतावनी भी दी है कि यदि समझौता नहीं हुआ तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि बातचीत के साथ-साथ दबाव की नीति भी जारी है।
दूसरी ओर, ईरान ने इन दावों को सिरे से नकार दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कहा कि अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत की संभावना फिलहाल नहीं है।
अराघची के अनुसार दोनों देशों के बीच भरोसे का स्तर “शून्य” पर है, ऐसे में किसी समझौते की बात करना वास्तविकता से दूर है। उनका यह बयान दोनों देशों के बीच गहरे अविश्वास को दर्शाता है।
इस बीच, चीन और पाकिस्तान ने संयुक्त रूप से खाड़ी और मध्य पूर्व में तुरंत युद्धविराम की अपील की है। दोनों देशों ने बातचीत और कूटनीति को ही एकमात्र समाधान बताया है।
बीजिंग में हुई बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया कि क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए। साथ ही नागरिकों और गैर-सैन्य ठिकानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
चीन और पाकिस्तान ने खास तौर पर महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे जैसे ऊर्जा संयंत्रों और परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन की भी अपील की।
बयान में होर्मुज जलडमरूमध्य का भी जिक्र किया गया, जिसे वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम बताया गया। दोनों देशों ने वहां जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करने की मांग की।
हालांकि व्हाइट हाउस ने चीन-पाकिस्तान की इस अपील को खास तवज्जो नहीं दी और अपने रुख पर कायम रहा। अमेरिका का फोकस सीधे ईरान के साथ बातचीत पर ही नजर आ रहा है।
अमेरिकी अधिकारी ने यह भी संकेत दिया कि पर्दे के पीछे कूटनीतिक संपर्क जारी हैं, लेकिन उनकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि यह बेहद संवेदनशील प्रक्रिया है।


