हमीरपुर| जिले के बिवांर कस्बे में चैत्र नवरात्र की अष्टमी के अवसर पर आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ भव्य जवारा जुलूस निकाला, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं और पुरुषों ने भाग लिया। यह जुलूस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा माना जाता है।
जुलूस के दौरान महिलाएं सिर पर जवारा और ज्वाला लेकर श्रद्धा भाव से आगे बढ़ती रहीं। उनके साथ सजी-धजी सान्गो की आकर्षक झांकियां लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनीं। पूरे कस्बे में भक्तिमय माहौल छाया रहा और लोग जुलूस के स्वागत में जगह-जगह खड़े दिखाई दिए।
महिलाएं देवी गीत गाते हुए जुलूस में शामिल रहीं, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। वहीं पुरुषों की टोली माता के पारंपरिक देवी गीत ‘अचरी’ का गायन करती हुई आगे बढ़ रही थी। ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों की गूंज से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
यह जुलूस हर वर्ष चैत्र नवरात्र की अष्टमी को निकाला जाता है और इसे सदियों पुरानी परंपरा के रूप में आज भी निभाया जा रहा है। स्थानीय लोगों के लिए यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है।
नवरात्र के पहले दिन श्रद्धालु विधि-विधान से जवारों को बोते हैं और कलश की स्थापना करते हैं। इसके बाद अष्टमी तक उनकी नियमित पूजा-अर्चना की जाती है। अष्टमी के दिन इन जवारों को गांव के प्रमुख मंदिरों में ले जाकर पूजा के बाद विधिवत विसर्जन किया जाता है।
इस दौरान पुरुष श्रद्धा स्वरूप माता की सान्गो को अपने गालों में छिदवाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से देवी प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। कार्यक्रम के अंत में इन सान्गो को माता के मंदिरों में पुनः स्थापित कर दिया जाता है, जिससे यह परंपरा निरंतर आगे बढ़ती रहती है।


