भगवान विमलनाथ के जयघोष से गूंजा तीर्थ परिसर, अगले वर्ष हजार साधकों के साथ अष्टम तप शिविर का संकल्प
कंपिल (फर्रुखाबाद): जैन आस्था के प्रमुख केंद्र कंपिल तीर्थ (Kendra Kampil Tirtha) में गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। मुंबई (Mumbai) से आए लगभग 300 जैन श्रद्धालुओं ने भगवान विमलनाथ के चरणों में शीश नवाकर सामूहिक अभिषेक एवं विधि-विधान से पूजन किया। प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर मंत्रोच्चार, स्तुति और आराधना से गुंजायमान हो उठा, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया।
यह आध्यात्मिक यात्रा श्री आर्य रक्षित तत्वज्ञान विद्यापीठ (मुंबई) एवं उत्तर प्रदेश कालिकाजी तीर्थ यात्रियों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई। यात्रा प्रभारी राजेश भाई के नेतृत्व में श्रद्धालु प्रातःकाल तीर्थ परिसर पहुंचे और भगवान विमलनाथ का जलाभिषेक कर विशेष पूजा-अर्चना संपन्न की। श्रद्धालुओं की अनुशासित और समर्पित उपस्थिति ने आयोजन को भव्यता प्रदान की।
अगले वर्ष हजार साधकों के साथ अष्टम तप का संकल्प
दर्शन एवं पूजन के उपरांत श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष कंपिल तीर्थ में एक हजार साधकों के साथ पांच दिवसीय अष्टम तप साधना शिविर आयोजित करने का संकल्प लिया। जैन परंपरा में अष्टम तप का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सामूहिक साधना से आत्मशुद्धि, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
सत्यप्रकाश अग्रवाल ‘उत्तर प्रदेश भामाशाह’ से सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान कंपिल तीर्थ के विकास में उल्लेखनीय योगदान देने पर उद्योगपति एवं समाजसेवी सत्यप्रकाश अग्रवाल को ‘उत्तर प्रदेश भामाशाह’ की उपाधि से सम्मानित किया गया। उपस्थित गणमान्यजनों ने उन्हें उपरणा, शॉल एवं माल्यार्पण कर सम्मानित किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि उनके सहयोग से तीर्थ क्षेत्र में विकास कार्यों को नई गति मिली है।
तीर्थ विकास और रेल सेवा की उठी मांग
पंचकल्याणक यात्रा समिति की ओर से आयोजित सामूहिक अभिषेक में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। यात्रा प्रमुख राजेश भाई ने कहा कि यदि कंपिल में वार्षिक मेला नियमित रूप से आयोजित किया जाए और मुंबई से सीधी दैनिक रेल सेवा शुरू हो, तो तीर्थयात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इससे स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
सत्यप्रकाश अग्रवाल ने भी अपने संबोधन में कहा कि मुंबई सहित पश्चिम भारत के अनेक शहरों के श्रद्धालुओं की विशेष आस्था कंपिल तीर्थ से जुड़ी है। यदि नियमित रेल सेवा प्रारंभ हो जाती है, तो प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालुओं का आगमन संभव है, जिससे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को बल मिलेगा।
सुविधाओं के विस्तार पर जोर
मंदिर ट्रस्ट के सचिव मुकुंदजी शाह ने बताया कि तीर्थ क्षेत्र में सुविधाओं के विस्तार एवं आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं के ठहरने, भोजन और स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने की दिशा में योजनाएं तैयार की जा रही हैं। मुंबई, अहमदाबाद, गुजरात और राजस्थान सहित विभिन्न शहरों से आए श्रद्धालुओं ने एक स्वर में कहा कि कंपिल तीर्थ आध्यात्मिक शांति और साधना का प्रमुख केंद्र है। सामूहिक आराधना से जहां आंतरिक शुद्धि का अनुभव होता है, वहीं तीर्थ की गरिमा और महत्ता भी और अधिक बढ़ती है।


