संभल
हयात नगर स्थित अयोध्या मंदिर में विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों द्वारा सीता अवतरण दिवस श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर एक छोटी बच्ची को माता जानकी के रूप में सजाकर विधिवत पूजा-अर्चना की गई, जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण से भर गया।
कार्यक्रम में जिला संयोजिका दीपा बाष्णेय ने सीता माता को नारी शक्ति का सर्वोच्च प्रतीक बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में उन्हें आदर्श नारी के रूप में पूजा जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि माता सीता ने अपने जीवन में अनेक कठिनाइयों के बावजूद धैर्य, मर्यादा और पतिव्रता धर्म का पालन करते हुए आदर्श जीवन प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के दौरान रीता आर्य ने माता सीता के जन्म की पौराणिक कथा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि मिथिला नरेश राजा जनक द्वारा हल चलाते समय भूमि से एक दिव्य कन्या प्रकट हुई थीं, जिन्हें उन्होंने अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार किया और वही आगे चलकर माता सीता के रूप में विख्यात हुईं।
इस अवसर पर उपस्थित महिलाओं और श्रद्धालुओं ने भी अपने विचार साझा किए और सीता माता के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। सभी ने नारी सम्मान और संस्कारों के पालन का संकल्प लिया।
आयोजकों ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करते हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए और इसे सफल बताया। अंत में प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।


