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Monday, February 16, 2026

5 मार्च के आम चुनाव से पहले 63 बिंदुओं की आचार संहिता लागू

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काठमांडू। नेपाल निर्वाचन आयोग ने आगामी 5 मार्च को होने वाले आम चुनाव से पहले 63 बिंदुओं वाली विस्तृत आचार संहिता जारी की है। आयोग ने राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को चुनावी पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं।

आयोग के अनुसार, 25,000 नेपाली रुपये से अधिक की किसी भी वित्तीय सहायता को केवल बैंकिंग माध्यम से ही स्वीकार किया जाएगा। नकद लेनदेन पर रोक का उद्देश्य चुनावी खर्च पर निगरानी बढ़ाना और अवैध धन के प्रवाह को रोकना है।

निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी उम्मीदवार 2 मार्च तक ही चुनाव प्रचार कर सकेंगे। प्रचार का समय सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक निर्धारित किया गया है, ताकि नियमों का समान रूप से पालन सुनिश्चित हो सके।

इसके अलावा, मतदान से 48 घंटे पहले सभी प्रकार के चुनाव प्रचार पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इस अवधि में रैलियां, जनसभाएं और प्रचार सामग्री का वितरण पूरी तरह से बंद रहेगा।

आचार संहिता में पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर दिया गया है। पिछले वर्ष की तरह इस बार भी चुनाव प्रचार के दौरान प्लास्टिक और पॉलीथीन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है। आयोग ने कहा है कि स्वच्छ और जिम्मेदार चुनाव अभियान सभी दलों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। आयोग ने स्पष्ट किया कि आचार संहिता तोड़ने वाले उम्मीदवार की उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है या उसे छह वर्षों तक किसी भी चुनाव में भाग लेने से अयोग्य घोषित किया जा सकता है।

इस बीच, नेपाल की कार्यकारी प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने नागरिकों से चुनाव में सक्रिय भागीदारी की अपील की है। उन्होंने कहा कि विशेष परिस्थितियों में हो रहे ये चुनाव देश के लोकतांत्रिक भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।

तापलेजुंग जिले के दौरे के दौरान प्रधानमंत्री कार्की ने कहा कि यह चुनाव नेपाल के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से शांतिपूर्ण और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने में सहयोग देने का आह्वान किया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सख्त आचार संहिता से चुनावी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी। साथ ही बैंकिंग लेनदेन की अनिवार्यता से चुनावी फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।

नेपाल में यह चुनाव मौजूदा राजनीतिक गतिरोध के बीच हो रहा है। ऐसे में निर्वाचन आयोग की सख्ती और सरकार की अपील इस बात का संकेत है कि प्रशासन किसी भी स्थिति में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना चाहता है।

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