लखनऊ। प्रदेश में बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ा सुधार देखने को मिला है। ट्रांसफार्मरों के क्षतिग्रस्त होने की दर में करीब चार प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे प्रदेश के ऊर्जा विभाग को हर साल तीन अरब रुपये से अधिक की बचत होने का अनुमान है। यह उपलब्धि बढ़ी निगरानी और नियमित अनुरक्षण (मेंटेनेंस) कार्यों के चलते संभव हो पाई है।
उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा अपनाई गई नई रणनीति के तहत अब वर्ष में दो बार विशेष अनुरक्षण अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान प्रत्येक ट्रांसफार्मर की तकनीकी जांच, तेल भराई, अर्थिंग व्यवस्था को दुरुस्त करना, फ्यूज सेट और अन्य उपकरणों की समीक्षा की जाती है। इसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं और ट्रांसफार्मरों के जलने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है।
आंकड़ों के मुताबिक, पहले प्रदेश में हर साल लाखों वितरण ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त होते थे और सैकड़ों ट्रांसफार्मर जल जाते थे। लेकिन वर्ष 2025-26 में इनकी संख्या में स्पष्ट गिरावट दर्ज की गई है। विभिन्न डिस्कॉम क्षेत्रों—पूर्वांचल, मध्यांचल, दक्षिणांचल और पश्चिमांचल—सभी में क्षतिग्रस्तता दर कम हुई है, जो बेहतर प्रबंधन और तकनीकी निगरानी का परिणाम मानी जा रही है।
हालांकि, इस सुधार के बीच पावर कॉर्पोरेशन के एक नए आदेश ने विवाद भी खड़ा कर दिया है। निगम ने ट्रांसफार्मर जलने की स्थिति में संबंधित अभियंताओं से उसकी कीमत का एक हिस्सा वसूलने का निर्देश जारी किया है। इस आदेश के तहत 10 से 63 केवीए तक के ट्रांसफार्मर के जलने पर अवर अभियंता, एसडीओ और अधिशासी अभियंता से अलग-अलग प्रतिशत में लागत वसूली की जाएगी। बड़े ट्रांसफार्मरों के लिए भी इसी तरह का प्रावधान किया गया है।
इस निर्णय का अभियंता संघ ने कड़ा विरोध किया है। संघ का कहना है कि ट्रांसफार्मर जलने के पीछे कई तकनीकी और बाहरी कारण होते हैं, जैसे ओवरलोडिंग, खराब अर्थिंग, समय पर तेल न डालना या घटिया सामग्री का उपयोग। ऐसे में पूरी जिम्मेदारी अभियंताओं पर डालकर उनसे वसूली करना अनुचित और शोषणकारी कदम है।
यूपी पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल का कहना है कि यह कदम अभियंताओं में जिम्मेदारी की भावना बढ़ाने के लिए उठाया गया है। उन्होंने कहा कि निगम का लक्ष्य है कि प्रदेश में एक भी ट्रांसफार्मर न जले और इसके लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि रखरखाव व्यवस्था को और मजबूत किया जाए तथा पुराने और जर्जर ट्रांसफार्मरों को समय पर बदला जाए, तो आने वाले समय में ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्तता दर को और भी कम किया जा सकता है। फिलहाल, यह सुधार प्रदेश की बिजली व्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
यूपी पावर कॉर्पोरेशन को सालाना अरबों की बचत, नई रणनीति पर तेज काम


