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Saturday, April 11, 2026

मां की उम्र बेटे से कम दर्ज, दो साल से दफ्तरों के चक्कर काट रहा परिवार

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लखनऊ। सरकारी दस्तावेजों में एक हैरान कर देने वाली विसंगति सामने आई है, जहां एक मां की उम्र उसके ही बेटे से कम दर्ज कर दी गई है। यह अजीबोगरीब त्रुटि न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि एक परिवार के लिए बीते दो वर्षों से परेशानी का कारण भी बनी हुई है। उम्र में इस उलटफेर को सही कराने के लिए पीड़ित परिवार लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है।
मामला लखनऊ के बंथरा क्षेत्र के हरौनी गांव की निवासी नीता से जुड़ा है। नीता की वास्तविक उम्र करीब 60 वर्ष बताई जा रही है, लेकिन उनके आधार कार्ड में जन्मतिथि 1 जनवरी 1995 दर्ज है। हैरानी की बात यह है कि उनके बेटे शैलेंद्र की जन्मतिथि 1 जनवरी 1996 दर्ज है, यानी सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक मां अपने बेटे से एक साल छोटी हो गई है।
इस गंभीर त्रुटि को सुधारने के लिए नीता ने कई बार आधार कार्ड केंद्र में आवेदन किया, लेकिन हर बार उनका आवेदन किसी न किसी कारण से खारिज कर दिया गया। आधार कार्ड में दर्ज गलत जन्मतिथि के कारण उन्हें सरकारी योजनाओं और अन्य जरूरी कार्यों में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जब आधार केंद्र से समाधान नहीं मिला तो परिवार ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय का रुख किया, ताकि चिकित्सकीय परीक्षण के जरिए सही उम्र का निर्धारण कराया जा सके। शुक्रवार को परिजन सीएमओ कार्यालय पहुंचे और परिवार रजिस्टर सहित अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिसमें नीता की उम्र 60 वर्ष दर्ज है। इसके बावजूद वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली।
सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में विभाग के पास ऐसा कोई आदेश नहीं है, जिसके तहत सीधे तौर पर आयु निर्धारण की प्रक्रिया अपनाई जा सके। उन्होंने कहा कि यदि किसी सक्षम विभाग से इस संबंध में अनुरोध प्राप्त होता है, तभी एक मेडिकल बोर्ड गठित कर जांच कराई जा सकती है।
पीड़ित महिला के बेटे शैलेंद्र का कहना है कि वह पिछले दो वर्षों से एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक भटक रहे हैं, लेकिन कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही है। अब परिवार न्याय पाने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहा है।
यह मामला न सिर्फ सरकारी तंत्र की खामियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि एक छोटी सी तकनीकी गलती कैसे किसी आम नागरिक के लिए बड़ी समस्या बन सकती है। ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन इस तरह के मामलों में त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि लोगों को अनावश्यक परेशानियों से बचाया जा सके।

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