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Monday, April 13, 2026

एवरेस्ट पर फर्जी रेस्क्यू पर हुई सख्ती, नेपाल सरकार ने बनाई उच्चस्तरीय समिति

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काठमांडू
नेपाल सरकार ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट क्षेत्र में बढ़ते फर्जी हेलीकॉप्टर रेस्क्यू मामलों पर कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने इस तरह की धोखाधड़ी को रोकने के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है, जिससे पर्यटन क्षेत्र में पारदर्शिता और विश्वसनीयता कायम रखी जा सके।

यह समिति संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के संयुक्त सचिव के नेतृत्व में काम करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य हेलीकॉप्टर रेस्क्यू से जुड़े मामलों की निगरानी करना और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है।

सरकार के अनुसार, कुछ ट्रैवल ऑपरेटरों द्वारा झूठे रेस्क्यू दिखाकर बीमा कंपनियों से बड़ी रकम वसूलने के मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेपाल की पर्यटन छवि को प्रभावित करने की आशंका बढ़ा दी है।

बताया गया है कि कई मामलों में मामूली ऊंचाई की बीमारी से पीड़ित पर्यटकों को भी अनावश्यक रूप से हेलीकॉप्टर से निकाला गया। इसके बाद अलग-अलग बीमा कंपनियों से मुआवजा लेने की कोशिश की गई, जिससे यह पूरा मामला एक बड़े घोटाले का रूप ले बैठा।

इस मामले में नेपाल पुलिस पहले ही 32 लोगों को आरोपी बना चुकी है। इन पर लगभग 20 मिलियन अमेरिकी डॉलर के बीमा घोटाले में शामिल होने का आरोप है, जो पर्यटन क्षेत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये घटनाएं पूरे पर्यटन उद्योग का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं, लेकिन दूरदराज के इलाकों में निगरानी की कमी को दूर करना बेहद जरूरी है। खासकर एवरेस्ट क्षेत्र जैसे संवेदनशील स्थानों पर सख्त नियंत्रण की जरूरत महसूस की जा रही है।

तत्काल प्रभाव से सरकार ने जांच प्रक्रिया तेज करने, दोषियों की पहचान करने और उन्हें सार्वजनिक रूप से उजागर करने का निर्णय लिया है। साथ ही, दोषी ट्रैवल एजेंसियों और गाइड्स को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी भी की जा रही है।

नई व्यवस्था के तहत डिजिटल तकनीक का उपयोग बढ़ाया जाएगा। रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी के लिए ट्रैकिंग सिस्टम और डेटा सत्यापन को अनिवार्य बनाया जा सकता है, जिससे फर्जीवाड़े की गुंजाइश कम हो सके।

दीर्घकालिक योजना में गाइड्स और ट्रैवल एजेंसियों के लाइसेंस को और मजबूत करना शामिल है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि केवल प्रशिक्षित और प्रमाणित लोग ही इस तरह की सेवाओं में शामिल हों।

इसके अलावा, नैतिक पर्यटन (एथिकल टूरिज्म) के मानकों को भी सख्ती से लागू करने की बात कही गई है। इससे पर्यटकों की सुरक्षा के साथ-साथ देश की अंतरराष्ट्रीय साख को भी बनाए रखने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से पर्यटन उद्योग में अनुशासन आएगा और ईमानदार ऑपरेटरों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, बीमा कंपनियों का भरोसा भी दोबारा बहाल हो सकेगा।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नेपाल सरकार की यह सख्ती जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती है। फिलहाल, एवरेस्ट क्षेत्र में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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