डॉ. विजय गर्ग
बचपन मानव जीवन का सबसे मधुर और सुखद चरण होता है। इस चरण में बच्चे जो कुछ भी सीखते हैं, वह उनके पूरे जीवन का आधार बनता है। इस सीखने की यात्रा में माँ की भूमिका सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण होती है। माता ही बच्चे की पहली शिक्षिका होती हैं, जो उसे बिना किसी किताब या कक्षा के वास्तविक जीवन पाठ सिखाती हैं।
बच्चे अपने बचपन में सबसे पहले अपनी मां से बोलना सीखते हैं। माँ के मीठे शब्द, लोरी और स्नेह भरे वचन बच्चे की भाषा का आधार होते हैं। इसके अलावा, माँ ही बच्चे को चलना, खाना और अपने आस-पास की दुनिया को समझना सिखाती है। ये सभी बातें बच्चे के आत्मविश्वास को मजबूत करती हैं।
माँ न केवल दिन-प्रतिदिन की आदतें सिखाती है, बल्कि वह बच्चे में अच्छे मूल्य भी पैदा करती है। सत्यता, ईमानदारी, दया और सहयोग जैसे गुण माँ के शिक्षणों के माध्यम से ही बच्चे में विकसित होते हैं। जब माँ अपने कर्मों से ये मूल्य प्रदर्शित करती है, तो बच्चे उन्हें आसानी से अपना लेते हैं।
इसके अलावा, माँ बच्चे को जीवन की कठिनाइयों का सामना करना भी सिखाती है। वह अपने अनुभवों और सलाह के माध्यम से बच्चे को हर चुनौती का मुकाबला करने के लिए साहस प्रदान करती है। माँ का प्यार और समर्थन बच्चे के लिए एक मजबूत ढाल बन जाता है, जो उसे हर स्थिति में संभालता है।
आज के तेजी से बदलते समय में, जहां प्रौद्योगिकी और बाहरी प्रभाव बढ़ रहे हैं, मां की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। माँ बच्चे को सही और गलत में अंतर करना सिखाती है और उसे सही रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करती है। बच्चों के जीवन में माँ का योगदान: शिक्षा और संस्कार बचपन जीवन का वह कोमल समय होता है जब मन एक कोरी स्लेट की तरह होता है। इस स्लेट पर सबसे पहले और गहरे अक्षर माँ द्वारा उकेरे जाते हैं। बच्चा दुनिया को माँ की आँखों से देखना शुरू कर देता है और उसकी वाणी के माध्यम से शब्दों को पहचानता है।
भाषा और संचार की शिक्षा बच्चे को अपनी मातृभाषा का ज्ञान उसकी मां से ही प्राप्त होता है। माँ द्वारा सुनाए जाने वाले पाठ, कहानियाँ और कथाएँ न केवल बच्चे के शब्दावली को बढ़ाती हैं, बल्कि उसे अपनी संस्कृति और विरासत से भी जोड़ती हैं।
नैतिक मूल्य-मूल्य और संस्कार सच बोलना, दूसरों का सम्मान करना और सहानुभूति रखना—यह गुण बच्चा स्कूल जाने से बहुत पहले अपनी माँ के व्यवहार से सीखता है।माँ बच्चे को सही और गलत में अंतर सिखाती हैं।उसकी छोटी-छोटी सलाह जीवन के बड़े निर्णय लेने में सहायक होती है।
मुसीबतों से लड़ने का साहस माँ धैर्य और सहनशीलता का जीवित उदाहरण है। बच्चा देखता है कि कैसे उसकी माँ मुस्कुराकर घर की चुनौतियों को हल करती है। यह देखकर बच्चे में भी आत्मविश्वास पैदा होता है कि वह किसी भी कठिनाई का सामना कर सकता है।
अनुशासन और शिष्टाचार समय पर उठना, खाने-पीने का तरीका और अपने आस-पास की सफाई जैसी बुनियादी आदतें केवल माँ ही करती हैं। यह अनुशासन बच्चे की भविष्य की सफलता के लिए आधार बनता है।
अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि एक बच्चे के जीवन की सबसे बड़ी शिक्षा उसकी मां से ही शुरू होती है। माँ के प्यार, सहयोग और शिक्षाओं से ही बच्चा एक सफल और अच्छा इंसान बनता है। इसलिए हमें माँ की इस महान भूमिका का सम्मान और सराहना करनी चाहिए।
डॉ. विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य शैक्षिक स्तंभकार मलोट पंजाब


