‘अपनी मर्जी से जीवन जीने का अधिकार’—हाईकोर्ट ने दी स्वतंत्रता को प्राथमिकता
ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच ने एक महत्वपूर्ण और चर्चित फैसले में 19 वर्षीय युवती को अपने प्रेमी के साथ रहने की अनुमति दे दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बालिग व्यक्ति को अपने जीवन से जुड़े फैसले स्वयं लेने का पूर्ण अधिकार है।
मामले में युवती ने कोर्ट के सामने पेश होकर कहा कि उसका विवाह उससे 21 वर्ष बड़े व्यक्ति से हुआ था, लेकिन वह वैवाहिक जीवन से संतुष्ट नहीं है। उसने बताया कि वह अपनी इच्छा से अपने प्रेमी अनुज कुमार के साथ रहना चाहती है और उस पर किसी प्रकार का दबाव नहीं है।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि चूंकि युवती बालिग है, इसलिए उसे अपनी पसंद से जीवन जीने और साथी चुनने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। कोर्ट ने यह भी माना कि किसी भी बालिग महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध साथ रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
स्वतंत्रता और अधिकार पर जोर
अदालत ने अपने आदेश में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों को सर्वोपरि बताया। साथ ही प्रशासन को निर्देश दिया कि युवती की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उसके फैसले में कोई बाधा न डाली जाए।


