अमृतपुर फर्रुखाबाद
जनपद के थाना क्षेत्र के गांव गूजरपुर पमारान में हुए बहुचर्चित ओमवीर राठौर पुत्र पेशकार हत्याकांड में विवेचना के दौरान बरती गई कथित लापरवाही अब पुलिस विभाग के लिए बड़ी कार्रवाई का कारण बन गई है। 118 प्रार्थना पत्रों के बावजूद समय पर कार्रवाई न होने के आरोपों ने मामला तूल पकड़ लिया, जिसके बाद उच्चाधिकारियों ने सख्त रुख अपनाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए भानु भास्कर, अपर महानिदेशक कानपुर जोन ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए विशेष टीम गठित कर मौके पर भेजा है।
जांच टीम में उप निरीक्षक वंश बहादुर सिंह, हेड कांस्टेबल मनीष सिंह एवं निरीक्षक अमरपाल सिंह को शामिल किया गया है, जो पूरे मामले की गहन जांच कर रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस प्रकरण में विवेचक रवि सोलंकी तथा पूर्व में तैनात रही थाना प्रभारी मोनू शाक्या की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि जांच में आवश्यक साक्ष्यों को नजरअंदाज किया गया और थाने में बैठकर ही लगभग 25 पर्चे काट दिए गए, जिससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लग गया।प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आने के बाद पुलिस विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए विवेचक रवि सोलंकी एवं पूर्व थाना प्रभारी मोनू शाक्या को निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।पीड़ित पक्ष का कहना है कि वे लगातार प्रार्थना पत्र देते रहे, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि यदि समय रहते प्रभावी और निष्पक्ष कार्रवाई की जाती, तो मामले में पहले ही न्याय मिल सकता था।
सूत्रों के अनुसार, जानकारी प्राप्त हुई है की संबंधित टीम दस्तावेजों, केस डायरी व विवेचना अभिलेखों की गहन जांच की जा रही है। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि आखिर इतने प्रार्थना पत्रों के बावजूद कार्रवाई में देरी क्यों हुई और किस स्तर पर चूक हुई।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच निष्पक्ष रूप से की जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर आगे और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई अहम खुलासे हो सकते


