लखनऊ
प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बीते कुछ दिनों से शांत पड़ी हलचल अचानक उस वक्त बढ़ गई जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अचानक दिल्ली दौरा और कुछ ही घंटों में वापसी चर्चा का विषय बन गई। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे निजी कार्यक्रम बताया गया, लेकिन सियासी गलियारों में इसे कैबिनेट विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, पिछले 15 दिनों में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ कई अहम बैठकों के बाद मंत्रिमंडल विस्तार का खाका लगभग तैयार हो चुका है। बताया जा रहा है कि नए चेहरों और मौजूदा मंत्रियों के फेरबदल को लेकर नामों पर सहमति बन चुकी है। भाजपा के उच्चस्तरीय सूत्रों का दावा है कि 15 अप्रैल तक कैबिनेट विस्तार के साथ-साथ निगम और बोर्डों में पदाधिकारियों की नियुक्ति का काम भी पूरा कर लिया जाएगा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार का विस्तार सिर्फ औपचारिक नहीं होगा, बल्कि इसमें जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए पार्टी सामाजिक समीकरण मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में पिछड़े, दलित और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों को मौका मिल सकता है।
वहीं, मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बीच मंत्री पद के दावेदारों की सक्रियता भी बढ़ गई है। कई संभावित चेहरे लगातार दिल्ली के चक्कर लगा रहे हैं और शीर्ष नेतृत्व से संपर्क साधने की कोशिश में जुटे हैं। दूसरी ओर, मौजूदा मंत्रियों के बीच भी हलचल तेज हो गई है, क्योंकि प्रदर्शन के आधार पर कुछ मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव या उन्हें हटाए जाने की संभावना जताई जा रही है।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में कैबिनेट विस्तार को लेकर सियासी माहौल गर्म हो चुका है। अब सबकी नजर आगामी दिनों में होने वाली दिल्ली की अहम बैठक पर टिकी है, जहां इस पूरे मुद्दे पर अंतिम मुहर लगने की संभावना है। यदि तय समयसीमा के अनुसार फैसला होता है, तो प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।


