कानपुर में सामने आए किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का नेटवर्क अब कई बड़े शहरों तक फैला हुआ सामने आ रहा है। जांच में पता चला है कि यह गिरोह कानपुर, मेरठ, नोएडा, गाजियाबाद, दिल्ली के साथ-साथ प्रयागराज और वाराणसी तक सक्रिय था। पुलिस को इस मामले में जेल भेजे गए शिवम अग्रवाल के साथ प्रयागराज के एक नर्सिंग होम में काम करने वाले नवीन पांडेय की अहम भूमिका का पता चला है, जिसकी तलाश में टीमें प्रयागराज और वाराणसी भेजी गई हैं।
डीसीपी पश्चिम एमएम कासिम आबिदी ने बताया कि इस अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट की जड़ें काफी गहरी हैं और इसमें कई लोग शामिल हो सकते हैं। जांच के दौरान शिवम अग्रवाल के मोबाइल से कुछ ऑडियो रिकॉर्डिंग मिली हैं, जिनमें वह नवीन पांडेय से बातचीत करता हुआ सुना गया है। इन रिकॉर्डिंग्स ने पूरे नेटवर्क के विस्तार और कार्यप्रणाली को उजागर कर दिया है।
एक रिकॉर्डिंग में दोनों के बीच बातचीत में यह सामने आया कि किडनी ट्रांसप्लांट के बाद एक महिला को दिल्ली के द्वारका स्थित अस्पताल भेजा जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। आरोप है कि महिला को एंबुलेंस की बजाय सामान्य वाहन से भेजा गया, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई। बातचीत में यह भी सामने आया कि परिजनों को “मैनेज” करने की बात कही जा रही थी।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि किडनी ट्रांसप्लांट के नाम पर लाखों रुपये का लेन-देन किया जाता था। एक अन्य ऑडियो में “साहिल” नाम के युवक द्वारा 24 लाख रुपये में सौदा तय करने की बात सामने आई है, जबकि आमतौर पर यह ट्रांसप्लांट 40 लाख रुपये तक में कराया जाता था। इस जानकारी के बाद पुलिस अब साहिल और उससे जुड़े लोगों की तलाश में जुट गई है।
पुलिस को चित्रकूट में एक टेक्नीशियन की लोकेशन भी मिली है, जो इस रैकेट से जुड़ा बताया जा रहा है। उसकी तलाश में पुलिस टीम रवाना की गई है। अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है और जल्द ही पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा। पुलिस का दावा है कि इस “मौत के कारोबार” में शामिल सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।.


