लखनऊ। राजधानी में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर लगाने को लेकर उपभोक्ताओं का विरोध तेज होता जा रहा है। आरोप है कि कई स्थानों पर बिना उपभोक्ताओं की सहमति के प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है और विरोध प्रदर्शन सामने आ रहे हैं।
इस मुद्दे को लेकर उपभोक्ता संगठनों ने भी खुलकर विरोध जताया है। UPRVUP के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि उपभोक्ताओं की मर्जी के खिलाफ स्मार्ट प्रीपेड मीटर थोपना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह उपभोक्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन है और इसे तत्काल रोका जाना चाहिए।
अवधेश वर्मा ने इस संबंध में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री और ऊर्जा सचिव को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। पत्र में उन्होंने मांग की है कि जिन अधिकारियों और कंपनियों ने बिना अनुमति के मीटर लगाने की कार्रवाई की है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर को अनिवार्य बनाने का निर्णय उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डाल सकता है। कई उपभोक्ताओं को तकनीकी जानकारी नहीं है, जिससे उन्हें बिजली उपयोग और भुगतान में परेशानी हो सकती है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि पारंपरिक पोस्टपेड व्यवस्था में उन्हें बिल भुगतान के लिए समय मिलता था, लेकिन प्रीपेड मीटर में पहले रिचार्ज करना अनिवार्य हो जाता है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।
इस पूरे मामले ने अब तूल पकड़ लिया है और आने वाले दिनों में यह एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। उपभोक्ता संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो व्यापक स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
फिलहाल, इस मामले को लेकर प्रशासन और बिजली विभाग की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन बढ़ते विरोध के बीच सरकार पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
प्रीपेड मीटर के खिलाफ उपभोक्ताओं का विरोध तेज, कार्रवाई की उठी मांग


