फर्रुखाबाद
जनपद के आसपास के गंगा पार ग्रामीण क्षेत्रों में शनिवार रात आई तेज आंधी और बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। तेज हवाओं, गरज-चमक और बारिश के चलते जहां विद्युत व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई, वहीं किसानों की तैयार खड़ी फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा है। हालात यह रहे कि करीब 120 गांवों में पूरी रात अंधेरा पसरा रहा और रविवार सुबह तक भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो सके।
बताया गया कि नीम करौली से नवाबगंज विद्युत उपकेंद्र को जोड़ने वाली 33,000 वोल्ट की मुख्य लाइन शनिवार रात करीब 8 बजे तेज हवाओं के दबाव में ब्रेकडाउन हो गई। इससे पूरे उपकेंद्र की आपूर्ति ठप हो गई और क्षेत्र के सैकड़ों गांवों में अचानक बिजली गुल हो गई। बिजली जाते ही ग्रामीणों को अंधेरे, पेयजल संकट और संचार व्यवस्था में बाधा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नवाबगंज विद्युत उपकेंद्र के जूनियर इंजीनियर अब्दुल मजीद ने तत्काल कार्रवाई करते हुए लाइनमैनों की चार टीमें गठित कीं। इन टीमों को रात के अंधेरे में ही टॉर्च की रोशनी के सहारे लाइन की पेट्रोलिंग के लिए रवाना किया गया। खराब मौसम और कठिन परिस्थितियों के बावजूद कर्मचारियों ने लगातार प्रयास जारी रखे और देर रात करीब 12 बजे मुख्य 33 केवी लाइन को चालू करने में सफलता प्राप्त की, जिससे उपकेंद्र की आपूर्ति आंशिक रूप से बहाल हो सकी।
हालांकि, उपकेंद्र से जुड़े चार फीडरों की लाइनों पर कई स्थानों पर पेड़ और उनकी मोटी डालियां टूटकर गिर गई थीं। कई जगहों पर तार टूट गए और खंभे भी क्षतिग्रस्त हो गए, जिसके कारण आपूर्ति पूरी तरह सुचारू नहीं हो पाई। परिणामस्वरूप नवाबगंज, रसूलपुर, ककरहा, हरिहरपुर, बरतारा सहित लगभग 120 गांवों में रविवार सुबह 8 बजे तक भी बिजली नहीं पहुंच सकी थी।
गांव रसूलपुर में एक बड़ा पेड़ ट्रांसफॉर्मर के ऊपर गिर गया, जिससे ट्रांसफॉर्मर खंभे सहित सड़क पर आ गिरा। इस घटना से न केवल बिजली आपूर्ति बाधित हुई, बल्कि रास्ता भी अवरुद्ध हो गया, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ। कई स्थानों पर ग्रामीणों को खुद पेड़ हटाने में सहयोग करना पड़ा।
बिजली गुल रहने से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट गहरा गया। हैंडपंप और सबमर्सिबल पंप बंद रहने से लोगों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा। वहीं मोबाइल नेटवर्क और चार्जिंग की समस्या के कारण लोग अपनों से संपर्क भी नहीं कर सके। गर्मी के मौसम में बिजली कटौती ने बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों की परेशानी और बढ़ा दी।
दूसरी ओर, इस आंधी और बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। किसानों के अनुसार गेहूं की फसल पूरी तरह पककर कटाई के लिए तैयार थी, लेकिन तेज हवाओं ने बालियों को जमीन पर गिरा दिया। कई खेतों में बारिश का पानी भर जाने से फसल के सड़ने का खतरा पैदा हो गया है। इससे उत्पादन में भारी गिरावट आने की आशंका जताई जा रही है।
किसानों का कहना है कि अगर मौसम जल्द साफ नहीं हुआ और पानी की निकासी नहीं हुई तो नुकसान और बढ़ सकता है। इस बेमौसम मार से किसान आर्थिक संकट में फंसते नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों और किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल सर्वे कराया जाए और नुकसान का आंकलन कर उचित मुआवजा दिलाया जाए।
बिजली विभाग के जेई अब्दुल मजीद ने बताया कि सभी टीमों को लगातार मरम्मत कार्य में लगाया गया है। गिरे हुए पेड़ों को हटाने और टूटे तारों को जोड़ने का कार्य तेजी से चल रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही सभी गांवों में विद्युत आपूर्ति पूरी तरह बहाल कर दी जाएगी।
फिलहाल, प्रशासन और बिजली विभाग के लिए यह स्थिति एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, वहीं ग्रामीण और किसान जल्द राहत मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।


