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Sunday, April 5, 2026

रिश्वतखोरी के आरोपी रिटायर जेई डी.के. सिंह पर एक्शन की लंबी फेहरिस्त

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– कई जिलों में कार्रवाई के बावजूद फिर तैनाती पर सवाल
फर्रुखाबाद/कन्नौज। फर्रुखाबाद सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय में तैनात रहे अवर अभियंता दीपेंद्र कुमार सिंह (डी. के. सिंह ) का मामला इन दिनों सुर्खियों में है, जिसके खिलाफ कई जिलों में कार्रवाई होने के बावजूद सिस्टम की खामियों के चलते वह बार-बार तैनाती हासिल करता रहा, और अब तो सारे रिकॉर्ड ही टूट गए फर्रुखाबाद में जनपद प्रतिनिधियों और उच्च अधिकारियों की मेहरबानी से वह रिटायर होने के बाद भी पूरी तरह कई महीनों से नियम विरुद्ध सरकारी काम कर रहा है और करोडों की ठगी फैलाये है । अब यह पूरा प्रकरण प्रशासनिक व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, डी. के. सिंह को सबसे पहले कन्नौज में रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था, वह जेल भी गया था । उस समय वहां के जिला अधिकारी ने तत्काल सख्ती दिखाते हुए उसे कार्यमुक्त कर दिया था। इसके बाद मामला शांत नहीं हुआ, बल्कि अन्य जिलों में भी उसके खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला जारी रहा।
बताया जा रहा है कि बदायूं में तैनाती के दौरान भी उसकी कार्यशैली पर सवाल उठे, जिसके बाद वहां के जिला अधिकारी ने शासन को पत्र भेजकर उसे कार्यमुक्त करने की संस्तुति की। इसी तरह शाहजहांपुर में भी उसके खिलाफ शिकायतें सामने आईं और वहां के जिलाधिकारी द्वारा कार्रवाई की गई।
फर्रुखाबाद में तैनाती के दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने भी इस अधिकारी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने कार्रवाई की और उसका तबादला करा दिया था ।
हालांकि, पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब आरोपी अधिकारी ने अपने तबादले के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया। उसने ईलाहाबाद हाई कोर्ट से स्थगन आदेश (स्टे) हासिल कर लिया और एक बार फिर उसी पद पर तैनात हो गया।
इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर विभिन्न जिलों के जिलाधिकारी लगातार कार्रवाई करते रहे, वहीं दूसरी ओर कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेकर आरोपी अधिकारी बार-बार सिस्टम में वापसी करता रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में केवल स्थानांतरण या कार्यमुक्ति पर्याप्त नहीं है, बल्कि ठोस विभागीय जांच और सख्त दंडात्मक कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
फिलहाल यह मामला एक बार फिर चर्चा में है और अब निगाहें शासन स्तर पर होने वाली संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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