लखनऊ। राजधानी में व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की किल्लत और बढ़ती कीमतों ने होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबार को गंभीर संकट में डाल दिया है। हाल ही में कॉमर्शियल सिलिंडर के दामों में 195 रुपये की बढ़ोतरी ने व्यापारियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। हालात ऐसे हैं कि कई कारोबारी अब शादी-ब्याह की बुकिंग तक लेने से बच रहे हैं।
व्यापारियों का कहना है कि एक ओर सिलिंडर आसानी से उपलब्ध नहीं हो रहे, वहीं दूसरी ओर कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है। इससे लागत बढ़ने के साथ मुनाफा लगभग खत्म हो गया है। कई होटल और ढाबा संचालक मजबूरी में वैकल्पिक साधनों जैसे भट्ठी और लकड़ी का सहारा ले रहे हैं।
कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों के अनुसार, 15 अप्रैल से सहालग का सीजन शुरू होने वाला है, लेकिन गैस की अनुपलब्धता के कारण वे नए ऑर्डर लेने से कतरा रहे हैं। कुछ कारोबारी केवल उन्हीं आयोजनों का काम ले रहे हैं, जहां ग्राहक खुद सिलिंडर उपलब्ध करा रहे हैं। कई लोगों ने डीजल भट्ठी तैयार कर ली है, ताकि काम किसी तरह चलाया जा सके।
मिठाई कारोबार पर भी इसका सीधा असर पड़ा है। धीमी आंच पर बनने वाली पारंपरिक मिठाइयों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है, क्योंकि पर्याप्त गैस उपलब्ध नहीं है। व्यापारियों का कहना है कि जरूरत के मुकाबले बहुत कम सिलिंडर मिल पा रहे हैं, जिससे उत्पादन क्षमता घट गई है और लागत बढ़ गई है।
इस संकट का असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ रहा है। मंदिरों में मिलने वाला प्रसाद भी महंगा हो गया है। पहले जहां 21 रुपये में प्रसाद मिल जाता था, अब उसकी कीमत 51 रुपये या उससे अधिक हो गई है। प्रसाद विक्रेताओं का कहना है कि गैस की कमी और बढ़ी हुई लागत के चलते दाम बढ़ाना मजबूरी बन गया है।
व्यावसायिक पीएनजी पहले ही महंगी हो चुकी है, जिससे खाद्य पदार्थों के दामों में भी वृद्धि हुई है। कई दुकानदारों ने अपने उत्पादों की नई रेट लिस्ट जारी कर दी है, हालांकि कुछ अभी भी ग्राहकों को बनाए रखने के लिए पुराने दाम पर सामान बेचने की कोशिश कर रहे हैं।


