कानपुर
यूपी बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के दौरान इस बार एक अलग ही तस्वीर सामने आई, जिसने परीक्षकों को भावुक भी किया और हैरान भी। कई छात्रों ने अपनी कॉपियों में अपनी गरीबी, संघर्ष और पढ़ाई की मजबूरियों का जिक्र करते हुए परीक्षकों से पास करने की गुहार लगाई। एक छात्र ने लिखा—“मैं बहुत गरीब हूं, पढ़ाई नहीं कर पाई, कोचिंग के पैसे नहीं थे… कृपया मुझे पास कर दीजिए,” जिससे कॉपियां जांच रहे शिक्षक भी भावुक हो उठे।
सिर्फ भावनात्मक अपील ही नहीं, बल्कि कुछ उत्तर पुस्तिकाओं में “गुरु दक्षिणा” के तौर पर 500 और 200 रुपये के नोट भी रखे मिले। कई छात्रों ने तो यहां तक लिख दिया कि “सर, अच्छे नंबर नहीं चाहिए, बस पास कर दीजिए,” जबकि कुछ ने फोन नंबर लिखकर ऑनलाइन पैसे भेजने की पेशकश भी की। इन घटनाओं ने शिक्षा व्यवस्था के सामने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है।
इस वर्ष शहर में कुल पांच मूल्यांकन केंद्र बनाए गए थे, जहां 18 मार्च से कॉपियों की जांच शुरू हुई थी। जीआईसी चुन्नीगंज और डीएवी इंटर कॉलेज में हाईस्कूल की कॉपियां जांची गईं, जबकि बीएनएसडी, एबी विद्यालय और सुभाष स्मारक इंटर कॉलेज में इंटरमीडिएट की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया गया। बुधवार को यह प्रक्रिया पूरी हो गई, जिसमें कुल 6,09,059 कॉपियों की जांच की गई।
परीक्षकों के अनुसार, हर साल इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन इस बार कुछ मामलों ने हंसी के साथ-साथ हैरानी भी बढ़ा दी। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव, संसाधनों की कमी और परीक्षा प्रणाली की चुनौतियों को दर्शाता है, जिस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।


