लखनऊ। देशभर में स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा स्पष्टिकरण दिया है। लोकसभा में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने साफ कहा है कि किसी भी उपभोक्ता के बिजली कनेक्शन को उसकी अनुमति के बिना प्रीपेड मोड में परिवर्तित नहीं किया जा सकता। इस बयान के बाद बिजली उपभोक्ताओं के बीच राहत की उम्मीद जगी है, वहीं नियमों के पालन को लेकर आवाज भी तेज हो गई है।
ऊर्जा मंत्री ने संसद में बताया कि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 47(5) के अनुसार, यदि कोई उपभोक्ता स्वयं प्रीपेड मीटर चाहता है तभी उसे यह सुविधा दी जाएगी। इसके लिए किसी प्रकार की सुरक्षा राशि भी नहीं ली जाती। साथ ही इलेक्ट्रिसिटी कंस्यूमर राइट्स रूल्स 2020 के तहत नए कनेक्शन स्मार्ट प्रीपेड मीटर के साथ दिए जा सकते हैं, लेकिन विशेष परिस्थितियों में इसके लिए राज्य विद्युत नियामक आयोग की अनुमति जरूरी होती है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी नीति प्रीपेड स्मार्ट मीटर को बढ़ावा देने की है, न कि इसे जबरन लागू करने की। इसके बावजूद कई राज्यों में उपभोक्ताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं कि बिना सहमति के मीटर बदले जा रहे हैं और कनेक्शन प्रीपेड मोड में परिवर्तित किए जा रहे हैं।
इसी मुद्दे पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने सरकार और नियामक आयोग से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लाखों उपभोक्ताओं के मीटर बिना अनुमति के प्रीपेड मोड में बदले जा चुके हैं, जो नियमों के खिलाफ है। परिषद ने मांग की है कि जिन उपभोक्ताओं के मीटर उनकी इच्छा के विरुद्ध बदले गए हैं, उन्हें उनकी पसंद के अनुसार वापस परिवर्तित किया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट मीटर व्यवस्था से पारदर्शिता और बिलिंग प्रणाली में सुधार हो सकता है, लेकिन इसे लागू करने में उपभोक्ताओं की सहमति और विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है। यदि नियमों का पालन नहीं किया गया तो यह योजना विवादों में घिर सकती है।


