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Wednesday, April 1, 2026

5 से 10 लाख में खरीद, 1 करोड़ में सौदा: विदेशी मरीजों तक फैली ‘किडनी मंडी’ का बड़ा खुलासा

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कानपुर। अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के बड़े रैकेट का सनसनीखेज खुलासा हुआ है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह न सिर्फ स्थानीय स्तर पर सक्रिय था, बल्कि इसके तार विदेशों तक फैले हुए थे। बीते दो वर्षों में इस गिरोह द्वारा 50 से अधिक अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किए जाने की बात सामने आई है।
इस पूरे मामले का खुलासा 29 मार्च को उस समय हुआ, जब शहर के चर्चित आहूजा हॉस्पिटल में एक संदिग्ध ट्रांसप्लांट की सूचना पुलिस को मिली। जांच में सामने आया कि 3 मार्च को भी दक्षिण अफ्रीका की एक महिला मरीज का इसी अस्पताल में अवैध रूप से किडनी प्रत्यारोपण किया गया था। इसके बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने शहर के कई अस्पतालों पर एक साथ छापेमारी कर पूरे गिरोह का भंडाफोड़ किया।
कार्रवाई के दौरान इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) कानपुर की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति आहूजा, उनके पति डॉ. सुरजीत, दलाल शिवम अग्रवाल सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा मेडलाइफ हॉस्पिटल के संचालक राजेश कुशवाहा, प्रिया हॉस्पिटल के संचालक नरेंद्र सिंह और आरोही हॉस्पिटल के संचालक राम प्रकाश कुशवाहा को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के अनुसार, इस रैकेट की जानकारी रावतपुर थाने को मिली थी, जिसके बाद कार्रवाई करते हुए काकादेव स्थित आहूजा हॉस्पिटल, कल्याणपुर आवास विकास-एक स्थित प्रिया हॉस्पिटल और पनकी-कल्याणपुर रोड स्थित मेडलाइफ हॉस्पिटल में छापेमारी की गई। जांच में पता चला कि यह गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को पैसों का लालच देकर किडनी डोनर बनाता था और जरूरतमंद मरीजों से मोटी रकम वसूल कर अवैध ट्रांसप्लांट कराता था।
एक मामले में सामने आया कि बिहार निवासी आयुष, जो देहरादून में एमबीए का छात्र है, से किडनी लेकर मुजफ्फरनगर निवासी पारुल तोमर को ट्रांसप्लांट की गई। इस पूरी प्रक्रिया को छिपाने के लिए दोनों को गॉल ब्लैडर की पथरी का मरीज बताकर अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया था, ताकि किसी को संदेह न हो।
पुलिस ने इस मामले में कुल 15 आरोपियों के खिलाफ मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है। वहीं, क्राइम ब्रांच की टीमें गिरोह के अन्य सदस्यों और जुड़े डॉक्टरों की तलाश में दिल्ली और नोएडा सहित कई स्थानों पर दबिश दे रही हैं।
इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन ने साफ किया है कि इस मामले में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए सख्त कार्रवाई जारी

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