– तेहरान का कड़ा विरोध, अंतरराष्ट्रीय कानून उल्लंघन बताकर कार्रवाई की मांग
तेहरान
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने भारत आने वाले अपने एक मानवता मिशन विमान पर हुए अमेरिकी हमले की कड़ी निंदा की है। इस घटना को लेकर तेहरान ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
ईरान ने इस हमले को सीधे तौर पर युद्ध अपराध करार दिया है और कहा है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है। घटना के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और गहराने की आशंका जताई जा रही है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, Mahan Air का यह विमान ईरान के मशहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से नई दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाला था। यह उड़ान एक मानवीय सहायता मिशन का हिस्सा थी।
बताया जा रहा है कि हमले में विमान को नुकसान पहुंचा, जिससे उसका निर्धारित मिशन बाधित हो गया। इस विमान को भारत से राहत सामग्री लेकर वापस ईरान जाना था।
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, विमान में दवाइयां और चिकित्सा उपकरणों से जुड़ा मिशन प्रस्तावित था, जो जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा था।
भारत स्थित ईरानी दूतावास ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। दूतावास ने कहा कि नागरिक विमान पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय नियमों का गंभीर उल्लंघन है।
ईरान ने Chicago Convention और Montreal Convention का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे हमले वैश्विक कानूनों के खिलाफ हैं।
इसके साथ ही Geneva Conventions के अतिरिक्त प्रोटोकॉल का उल्लेख करते हुए ईरान ने कहा कि नागरिक ठिकानों और मानवीय मिशनों को निशाना बनाना युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है।
ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की अपील की है।
जानकारी के मुताबिक, यह विमान 1 अप्रैल की सुबह नई दिल्ली पहुंचने वाला था, जहां से उसे राहत सामग्री लेकर वापस लौटना था।
बताया गया है कि विमान को भारत से करीब 11 टन मानवीय सहायता सामग्री लेकर ईरान जाना था, जिसमें दवाइयां और जरूरी उपकरण शामिल थे।
इस घटना के बाद नागरिक उड्डयन सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, खासकर ऐसे समय में जब क्षेत्र पहले से ही सैन्य तनाव से गुजर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं अंतरराष्ट्रीय मानवीय अभियानों को प्रभावित कर सकती हैं और वैश्विक सहयोग पर भी असर डाल सकती हैं।
गौरतलब है कि भारत ने हाल ही में ईरान को मानवीय सहायता भेजी थी, जिसे दोनों देशों के बीच मित्रता और सहयोग का प्रतीक बताया गया था।


