अमेठी
जनपद के जामो थाना क्षेत्र में पुलिसकर्मियों पर लगाए गए थर्ड डिग्री के आरोप जांच में पूरी तरह से निराधार साबित हुए हैं। एक प्राइवेट विद्युतकर्मी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों की जब गहनता से जांच की गई, तो सामने आया कि उसके शरीर पर मौजूद चोटें पुरानी थीं और गिरने के कारण लगी थीं, न कि पुलिस द्वारा की गई मारपीट से।
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली गई। जांच के दौरान कहीं भी पुलिसकर्मियों द्वारा मारपीट किए जाने का कोई प्रमाण नहीं मिला। इससे साफ हो गया कि विद्युतकर्मी द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह से असत्य और भ्रामक थे।
दरअसल, यह मामला पांच दिन पहले जामो थाना क्षेत्र के कंडा गौरा गांव में हुए ट्रांसफार्मर चोरी कांड से जुड़ा है। अज्ञात चोरों ने चलती विद्युत लाइन से ट्रांसफार्मर चोरी कर लिया था और उसमें से कीमती तार निकालकर उसे क्षतिग्रस्त हालत में छोड़कर फरार हो गए थे। इस संबंध में विद्युत विभाग की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी।
जांच के दौरान पुलिस को गोपनीय सूचना मिली कि अलीपुर गांव निवासी खुशीराम, जो प्राइवेट बिजली मैकेनिक का काम करता है, संदिग्ध हो सकता है और उसके शरीर पर चोट के निशान भी हैं। इसी आधार पर पुलिस ने उसे पूछताछ के लिए थाने बुलाया। पूछताछ में उसने खुद बताया कि चोटें गिरने से लगी हैं, जिसे उसने अस्पताल में भी दोहराया।
थाना प्रभारी विनोद सिंह ने स्पष्ट किया कि खुशीराम को केवल पूछताछ के लिए बुलाया गया था और उसके साथ किसी प्रकार की मारपीट नहीं की गई। उन्होंने कहा कि पुलिस पर लगाए गए आरोप पूरी तरह से झूठे हैं और मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से जारी है।


