– समर्थकों ने बताया बदले की कार्रवाई
काठमांडू
नेपाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तारी के तुरंत बाद उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने ओली को उनके भक्तपुर स्थित आवास से हिरासत में लिया। इसके बाद उन्हें काठमांडू पुलिस रेंज ले जाया गया और मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेजा गया।
फिलहाल ओली का इलाज त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में चल रहा है। बताया जा रहा है कि वे पहले से ही स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं और उनका किडनी ट्रांसप्लांट भी हो चुका है।
इस मामले में केवल ओली ही नहीं, बल्कि नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भी गिरफ्तार किया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि कार्रवाई का दायरा व्यापक है।
गिरफ्तारी के पीछे का मामला पिछले साल हुए ‘जेन-जी’ विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा बताया जा रहा है। इन प्रदर्शनों के दौरान व्यापक हिंसा हुई थी, जिसमें 77 लोगों की मौत हो गई थी और भारी नुकसान हुआ था।
सरकारी जांच आयोग ने इस हिंसा के लिए कई नेताओं और अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया था। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में इसे आपराधिक लापरवाही का मामला बताया और सख्त कार्रवाई की सिफारिश की थी।
यह जांच पूर्व न्यायाधीश गौरी बहादुर कार्की की अगुवाई में की गई थी। आयोग की रिपोर्ट में ओली समेत कई बड़े नाम शामिल थे, जिनके खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी।
रिपोर्ट के आधार पर बालेंद्र शाह की अगुवाई वाली सरकार ने कार्रवाई का फैसला लिया। इसके बाद पुलिस ने गिरफ्तारी वारंट जारी कर इस पूरे अभियान को अंजाम दिया।
हालांकि, ओली के समर्थकों ने इस कार्रवाई को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है।
सीपीएन-यूएमएल के वरिष्ठ नेता प्रदीप ज्ञावली ने कहा कि यह उनके नेता को कमजोर करने की साजिश है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया और विरोध जताया।
इस मुद्दे को लेकर पार्टी मुख्यालय में आपात बैठक भी बुलाई गई है, जिसमें आगे की रणनीति तय की जा रही है। समर्थकों के बीच भी नाराजगी देखी जा रही है।
वहीं, सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है और किसी के साथ पक्षपात नहीं किया गया है। सरकार ने साफ किया है कि कानून के सामने सभी बराबर हैं।
जांच रिपोर्ट में कई अन्य अधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं, जिन पर आगे कार्रवाई हो सकती है। इनमें पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हैं।


