मैनपुरी: जनपद के कुरावली थाना क्षेत्र के गांव आठपुरा में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया। तेज धमाके के साथ एक मकान की कच्ची दीवार और टिन शेड अचानक भरभराकर गिर गया, जिसकी चपेट में नीचे सो रहा परिवार आ गया। हादसे में महिला रूबी, उनके आठ वर्षीय बेटे दिलीप और 13 वर्षीय बेटी बेबी की मलबे में दबकर मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य बच्चियां पल्लवी और गुड़िया घायल हो गईं।
हादसे की आवाज सुनकर मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने तुरंत मलबा हटाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। तीनों की मौत की पुष्टि होते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बुधवार शाम जब पोस्टमार्टम के बाद मां-बेटे और बेटी के शव गांव पहुंचे, तो परिजनों में चीख-पुकार मच गई। विवाहित तीनों बेटियां सहित परिवार के सभी सदस्य शवों से लिपटकर बिलख-बिलख कर रोने लगे।
परिवार के मुखिया ब्रजेश का रो-रोकर बुरा हाल था। उनका हंसता-खेलता परिवार एक ही रात में उजड़ गया। गुरुवार दोपहर तीनों शवों को खेत पर ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान एक पिता ने भारी मन से अपने इकलौते बेटे और बेटी को मिट्टी में सुपुर्द किया, जबकि पत्नी रूबी की चिता को मुखाग्नि दी। अंतिम विदाई के बाद भी ब्रजेश काफी देर तक श्मशान स्थल पर बैठा रहा, मानो उसे अपने परिवार के बिछड़ने का यकीन ही न हो।
बताया गया कि ब्रजेश के पास करीब छह बीघा कृषि भूमि है और वह पंचर की छोटी सी दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। आर्थिक स्थिति साधारण होने के बावजूद वह अपने बच्चों की परवरिश में कोई कमी नहीं रखते थे। उनका इकलौता बेटा दिलीप उनसे बेहद जुड़ा हुआ था। दिनभर की मेहनत के बाद जब ब्रजेश घर लौटते थे, तो दिलीप दरवाजे पर उनका इंतजार करता मिलता था। रात को सोते समय वह पिता से कहानी सुनाने की जिद करता था।
एक ही रात में सब कुछ खत्म हो गया। इस दर्दनाक हादसे ने न सिर्फ एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है। ग्रामीणों की आंखें भी नम हैं और हर कोई इस घटना को याद कर भावुक नजर आ रहा है। प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने की मांग भी उठने लगी है।


