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Monday, April 20, 2026

विश्व प्रसिद्ध दाऊजी का हुरंगा: कोड़ों की मार और भक्ति के रंग में डूबा बलदेव

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– नंगे बदन गोपों पर बरसे कोड़े, अनोखी परंपरा देखने देश-विदेश से पहुंचे हजारों श्रद्धालु

मथुरा। ब्रजभूमि की होली अपनी अनूठी परंपराओं और उत्साह के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है। इसी कड़ी में मथुरा जनपद के बलदेव स्थित प्रसिद्ध दाऊजी मंदिर में गुरुवार को विश्व प्रसिद्ध दाऊजी का हुरंगा बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ खेला गया। इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु और पर्यटक बलदेव पहुंचे। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

दाऊजी का हुरंगा ब्रज की उन खास परंपराओं में से एक है, जो केवल बलदेव में ही देखने को मिलती है। इस दौरान गोपों का समूह नंगे बदन मैदान में उतरता है, जबकि गोपिकाएं हाथों में कोड़े लेकर गोपों पर तड़ातड़ प्रहार करती हैं। गोप बिना किसी प्रतिरोध के इन कोड़ों की मार सहते हैं और इसे भक्ति तथा परंपरा का प्रतीक माना जाता है। यह दृश्य देखने के लिए श्रद्धालु मंदिर की छतों, गलियों और आसपास की इमारतों पर खड़े होकर इस अद्भुत आयोजन का आनंद लेते हैं।

हुरंगा शुरू होने से पहले दाऊजी मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इसके बाद मंदिर परिसर में रंग-गुलाल उड़ता है और ढोल-नगाड़ों तथा ब्रज के पारंपरिक फाग गीतों के बीच हुरंगा का आयोजन शुरू होता है। जैसे ही गोप मैदान में उतरते हैं, गोपिकाएं कोड़ों के साथ उन्हें मारती हैं और पूरा माहौल उत्साह और उल्लास से भर जाता है। रंग, गुलाल और फाग गीतों के बीच यह दृश्य बेहद रोमांचक और आकर्षक बन जाता है।

ब्रज संस्कृति के जानकारों के अनुसार दाऊजी का हुरंगा भगवान बलराम और ब्रज की होली की परंपरा से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसे देखने के लिए हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। यही कारण है कि दाऊजी का हुरंगा देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध है।

इस आयोजन को देखते हुए प्रशासन की ओर से भी व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में बैरिकेडिंग की गई थी, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

हुरंगा के दौरान पूरा बलदेव क्षेत्र रंग-गुलाल से सराबोर दिखाई दिया। ब्रज के पारंपरिक फाग गीत, ढोल-नगाड़ों की थाप और श्रद्धालुओं का उत्साह इस आयोजन को और भी खास बना देता है। दाऊजी का हुरंगा केवल एक उत्सव नहीं बल्कि ब्रज की सदियों पुरानी आस्था, संस्कृति और परंपरा का जीवंत प्रतीक है, जिसे देखने के लिए हर साल हजारों लोग यहां पहुंचते हैं।

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