लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर स्वाभिमान और विरासत का मुद्दा गर्मा गया है। उन्नाव से सांसद साक्षी महाराज ने राजधानी लखनऊ में बने प्रेरणा स्थल को लेकर तीखा बयान दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में मांग की है कि वहां पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह (बाबूजी) की प्रतिमा भी स्थापित की जाए।
साक्षी महाराज ने कहा कि बाबूजी केवल एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि हिंदुत्व और सुशासन की मजबूत पहचान थे। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन से लेकर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को सख्ती से संभालने तक, अपने कार्यकाल में ऐतिहासिक फैसले लिए। ऐसे नेता की उपेक्षा “अन्याय” है और यह प्रदेश की जनता की भावनाओं के खिलाफ है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रेरणा स्थल का उद्देश्य महान नेताओं के योगदान को सम्मान देना है, तो फिर बाबूजी जैसे जननायक को इस सूची से बाहर क्यों रखा गया? उनका कहना है कि कल्याण सिंह ने पिछड़ों और सामान्य वर्ग दोनों के हितों के लिए मजबूती से आवाज उठाई और प्रदेश की राजनीति को नई दिशा दी।
सांसद ने यह भी संकेत दिया कि यदि उनकी मांग पर विचार नहीं किया गया तो वे इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाएंगे। उन्होंने इसे केवल प्रतिमा का सवाल नहीं, बल्कि “सम्मान और इतिहास के न्याय” का मुद्दा बताया।
राजनीतिक गलियारों में इस बयान के बाद हलचल तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि कल्याण सिंह की विरासत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, वहीं विरोधी इसे राजनीतिक बयानबाजी बता रहे हैं।
फिलहाल, प्रदेश सरकार या संबंधित प्राधिकरण की ओर से इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन इतना तय है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाएगा।
सवाल अब सीधा है—क्या प्रेरणा स्थल में बाबूजी को स्थान मिलेगा, या यह बहस और तीखी होगी? राजनीति की जमीन पर यह नया विवाद आने वाले समय में बड़ा रूप ले सकता है।






