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Monday, February 23, 2026

भोजपुरी को मिले राजभाषा का सम्मान:एच एन शर्मा

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नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर भोजपुरी समाज एवं मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली (कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग, दिल्ली सरकार) के संयुक्त तत्वावधान में “भोजपुरी हमार माई” विषय पर भव्य कवि सम्मेलन-सह-विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चंद्रशेखर जी के राजनीतिक सलाहकार रहे एच.एन. शर्मा ने भोजपुरी भाषा को राजभाषा की मान्यता देने की जोरदार मांग उठाई।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अमरेंद्र कुमार दुबे (पूर्व सचिव, भारत सरकार) उपस्थित रहे। अध्यक्षता अजीत दुबे (राष्ट्रीय अध्यक्ष, विश्व भोजपुरी सम्मेलन एवं अध्यक्ष, भोजपुरी समाज दिल्ली) ने की। विशिष्ट अतिथियों में प्रभाकर सिंह (पूर्व महानिदेशक, लोक निर्माण विभाग), एच.एन. शर्मा (पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी के राजनीतिक सलाहकार)डी.एन. सिंह (पूर्व सचिव, दिल्ली सरकार) की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम में आमंत्रित कवियों के रूप में विनय विनम्र, मुन्ना पाठक, देव कांत ‘देवलासी’ एवं कृष्ण जी पांडेय ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर किया। सांस्कृतिक प्रस्तुति में भोजपुरी लोकगीतों की मनोहारी प्रस्तुति श्रीमती विजय लक्ष्मी उपाध्याय एवं सुश्री अंजलि शिवाय ने दी।कार्यक्रम भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण अधिकारी संस्थान मे संपन्न हुआ।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. देवेंद्र नाथ तिवारी (सहायक आचार्य, राम लाल आनंद महाविद्यालय, दिल्ली) रहे।
निवेदक के रूप में डॉ. मनीष कुमार सिंह, विनयमणि त्रिपाठी, एल.एल. प्रसाद, डॉ. मनीष कुमार चौधरी एवं धनश्याम सिंह का नाम प्रमुख रूप से अंकित रहा।

अपने ओजस्वी संबोधन में एच.एन. शर्मा ने कहा कि जब देश पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी की 100वीं जन्मशती मना रहा है, तब यह ऐतिहासिक अवसर है कि भोजपुरी भाषा को उसका संवैधानिक और राजकीय सम्मान दिलाया जाए।
उन्होंने कहा कि भोजपुरी केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विश्व के अनेक देशों में बोली जाती है और यह करोड़ों लोगों की सांस्कृतिक पहचान है।

यदि इस सुनहरे अवसर पर इसे राजभाषा की मान्यता दी जाती है, तो यह जननायक चंद्रशेखर जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनसमूह ने भोजपुरी भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए एकजुट होकर संकल्प दोहराया। सभागार में गूंजती तालियों के बीच एच.एन. शर्मा की मांग एक जनभावना के रूप में उभरती दिखाई दी।

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