– सड़क हादसे में थमी मासूम सांसें, माता-पिता के फैसले ने कई जिंदगियों को दिया नया जीवन
– केरल सरकार ने ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ से किया सम्मान
तिरुवनंतपुरम (केरल)। कभी-कभी ईश्वर किसी नन्ही सी जान को धरती पर एक बड़े संदेश के साथ भेजता है। महज आठ महीने की मासूम आलिन शेरिन अब्राहम अब विश्व की सबसे कम उम्र की अंगदाता (ऑर्गन डोनर) के रूप में याद की जा रही हैं। सड़क हादसे में उनकी असमय मृत्यु ने परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया, लेकिन इसी अंधेरे में उनके माता-पिता ने ऐसा निर्णय लिया, जिसने कई घरों में उजाला कर दिया।
दर्द से टूटे दिल के बावजूद उन्होंने अपनी नन्ही परी के अंग दान करने की अनुमति दी। डॉक्टरों की तत्परता और संवेदनशीलता के साथ पूरी की गई प्रक्रिया के बाद, आलिन के अंगों ने जरूरतमंद मरीजों को नई जिंदगी दी। जिस बच्ची ने अभी दुनिया को ठीक से जाना भी नहीं था, वह जाते-जाते कई परिवारों की धड़कनों में बस गई।
माता-पिता के लिए अपने बच्चे को खोना जीवन का सबसे बड़ा दुःख होता है। अस्पताल के गलियारों में आंसुओं और सन्नाटे के बीच लिया गया यह फैसला आसान नहीं था। लेकिन उन्होंने सोचा—अगर उनकी बेटी की धड़कन किसी और की जिंदगी बचा सकती है, तो यह उसके जीवन की सबसे बड़ी विरासत होगी।
चिकित्सकों के अनुसार, अंगदान से गंभीर रूप से बीमार मरीजों को जीवनदान मिला। यह केवल चिकित्सा उपलब्धि नहीं, बल्कि मानवता की सबसे सुंदर मिसाल है।
आलिन शेरिन अब्राहम के माता-पिता के इस त्याग और साहस को नमन करते हुए केरल सरकार ने उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ प्रदान किया। सम्मान समारोह के दौरान माहौल बेहद भावुक था। मासूम की तस्वीर के सामने श्रद्धांजलि दी गई और पूरे सम्मान के साथ परिवार को सलामी दी गई।
यह सम्मान केवल एक परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज को यह संदेश देने के लिए था कि अंगदान महादान है।
भारत में हर वर्ष हजारों मरीज अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा में रहते हैं। समय पर डोनर न मिलने के कारण कई जिंदगियां असमय समाप्त हो जाती हैं। आलिन की कहानी बताती है कि एक निर्णय कई जिंदगियों की दिशा बदल सकता है।
नन्ही परी भले ही इस दुनिया से विदा हो गई, लेकिन उसकी मासूम मुस्कान अब उन परिवारों की खुशियों में जीवित है, जिन्हें उसने जीवन का दूसरा मौका दिया।
आलिन शेरिन अब्राहम — एक छोटी सी जिंदगी, लेकिन अमर संदेश।

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