फर्रुखाबाद। होली का त्यौहार नजदीक आने को के साथ ही घरों में होली की खुशबू महसूस की जाने लगी है। सुबह की हल्की गुनगुनी धूप और सर्दी की विदाई के बीच अब घर-आंगन में त्योहारी हलचल दिखाई देने लगी है। शहर हो या कस्बा, गांव हो या मोहल्ला—हर तरफ होली की तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है। छतों पर कचरी, पापड़ और चिप्स सूखते नजर आ रहे हैं, तो रसोईघर में गुजिया और नमकीन की चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं।
परंपरागत रूप से फाल्गुनी मौसम में मनाया जाने वाला रंगों का पर्व होली केवल रंग खेलने का उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक एकजुटता का प्रतीक भी है। जैसे-जैसे त्यौहार नजदीक आता है, घरों में एक अलग ही रौनक देखने को मिलती है। महिलाएं समूह बनाकर कचरी और पापड़ तैयार कर रही हैं। मोहल्लों में छतों पर फैली सफेद चादरों पर गोल-गोल पापड़ कतारबद्ध रखे दिखाई दे रहे हैं। बच्चे भी इन तैयारियों में उत्साह के साथ हाथ बंटा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाजार में भले ही रेडीमेड सामग्री उपलब्ध हो, लेकिन घर पर बनाए गए पकवानों का स्वाद और अपनापन अलग ही होता है। यही कारण है कि एक माह पूर्व से ही तैयारियां शुरू कर दी जाती हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में यह परंपरा आज भी जीवंत है। महिलाएं सुबह की धूप का पूरा लाभ उठाकर बड़ी मात्रा में कचरी और पापड़ तैयार कर रही हैं, ताकि होली के दिन मेहमानों का स्वागत पारंपरिक व्यंजनों से किया जा सके।
हालांकि बाजारों में अभी पूरी तरह से होली का रंग नहीं चढ़ा है। रंग-गुलाल और पिचकारियों की दुकानों पर पहले जैसी चहल-पहल फिलहाल कम दिखाई दे रही है, लेकिन दुकानदारों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में बिक्री में तेजी आएगी। मिठाई की दुकानों पर भी अभी सीमित तैयारियां हैं, परंतु होली से कुछ दिन पहले मांग बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
होली से जुड़ी पौराणिक कथाओं और धार्मिक मान्यताओं का अपना महत्व है, परंतु जमीन पर दिखाई देने वाला दृश्य पारिवारिक मेलजोल और पारंपरिक तैयारियों का होता है। होलिका दहन की तैयारियों के साथ-साथ घरों में साफ-सफाई और रंगाई-पुताई का कार्य भी शुरू हो चुका है। बच्चे अपने दोस्तों के साथ रंग खेलने की योजनाएं बना रहे हैं, तो बुजुर्ग पुराने समय की होलियों की यादें ताजा कर रहे हैं।
फर्रुखाबाद में हर वर्ष होली बड़े उत्साह और भाईचारे के साथ मनाई जाती है। शहर के विभिन्न मोहल्लों में सामूहिक होलिका दहन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी तैयारी प्रारंभ हो गई है। प्रशासन की ओर से भी शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की जाती है, ताकि त्योहार का उल्लास किसी प्रकार से प्रभावित न हो।
कुल मिलाकर, फाल्गुन की मस्ती अब धीरे-धीरे परवान चढ़ने लगी है। छतों पर सूखती कचरी और पापड़ इस बात का संकेत हैं कि रंगों का महापर्व दूर नहीं। आने वाले दिनों में बाजारों की रौनक बढ़ेगी, ढोल-नगाड़ों की थाप सुनाई देगी और पूरा जनपद रंगों में सराबोर नजर आएगा।


