मेरठ। जनपद में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर अधिवक्ताओं का आंदोलन रविवार को उस समय तेज हो गया, जब बड़ी संख्या में वकीलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा में पहुंचकर अपनी मांग रखने का प्रयास किया। हालांकि पुलिस प्रशासन ने उन्हें सभा स्थल तक जाने से रोक दिया, जिससे मौके पर तनाव की स्थिति बन गई।
जानकारी के अनुसार, मेरठ बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और प्रमुख अधिवक्ताओं को शनिवार रात ही एहतियातन नजरबंद कर दिया गया था, ताकि वे प्रधानमंत्री की सभा में न पहुंच सकें। इसके बावजूद रविवार सुबह कचहरी परिसर में बड़ी संख्या में अधिवक्ता एकत्र हुए और हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की।
नवनिर्वाचित मेरठ बार अध्यक्ष अनुज शर्मा के नेतृत्व में वकीलों ने मार्च निकालकर जनसभा स्थल की ओर बढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में रोक लिया। इस दौरान अधिवक्ताओं और पुलिस के बीच तीखी बहस और हल्की धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लाखों वादकारियों को न्याय के लिए प्रयागराज जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। उन्होंने मेरठ में हाईकोर्ट बेंच स्थापित करने की मांग दोहराते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद भी अधिवक्ता पैदल ही बेगमपुल की ओर बढ़ने लगे, जिन्हें रोकने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था और वीवीआईपी मूवमेंट को देखते हुए यह कदम उठाया गया। स्थिति पर नजर रखी जा रही है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।






