– अयोध्या आंदोलन की पृष्ठभूमि पर पूर्व सांसद का बड़ा बयान, 1992 से 2024 तक का सफर
लखनऊ/अयोध्या। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे विनय कटियार ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि “यदि कल्याण सिंह इस्तीफ़ा नहीं देते और हम लोग जेल नहीं जाते, तो आज राम मंदिर का निर्माण संभव नहीं होता।”
उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन में हजारों कार्यकर्ताओं ने संघर्ष किया, गिरफ्तारियां दीं और राजनीतिक जोखिम उठाए। यह आंदोलन केवल राजनीतिक नहीं बल्कि वैचारिक और सांस्कृतिक आस्था से जुड़ा था।
6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद तत्कालीन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफ़ा दे दिया था।
उस समय के प्रमुख तथ्य
6 दिसंबर1992 को ढांचा ध्वस्त,उसी दिन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का इस्तीफ़ा,प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू,हजारों कार्यकर्ता और नेता गिरफ्तार हुए थे।
विनय कटियार ने कहा कि उस दौर में आंदोलन से जुड़े कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को जेल जाना पड़ा, लेकिन संघर्ष जारी रहा।
9 नवंबर 2019 को सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या भूमि विवाद पर ऐतिहासिक निर्णय सुनाया।
फैसले के प्रमुख बिंदु मे
2.77 एकड़ विवादित भूमि राम जन्मभूमि न्यास को सौंपने का आदेश,मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ वैकल्पिक भूमि देने का निर्देश,केंद्र सरकार को ट्रस्ट गठन का आदेश और इसके बाद 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री द्वारा भूमि पूजन किया गया।
राम मंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा
मंदिर निर्माण कार्य 2020 से प्रारंभ हुआ, जिसमे कुल अनुमानित लागत लगभग 1,800 करोड़ रुपये
देशभर से करोड़ों श्रद्धालुओं का आर्थिक सहयोग हुआ,
22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुईं,
राम मंदिर ट्रस्ट के अनुसार देश-विदेश से करोड़ों भक्तों ने दान दिया।
विश्लेषकों के अनुसार, राम मंदिर आंदोलन ने भारतीय राजनीति को गहराई से प्रभावित किया।
प्रमुख राजनीतिक पड़ाव मे
1991 मे भाजपा की उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत सरकार बनी,
1992 मे ढांचा विध्वंस और राजनीतिक उथल-पुथल
2014 के बाद केंद्र में भाजपा की मजबूत वापसी हुईं।
2024 मे मंदिर उद्घाटन के साथ लंबे आंदोलन का समापन हुआ।
विनय कटियार ने अपने संबोधन में कहा कि यह मंदिर लाखों लोगों के त्याग और बलिदान का परिणाम है।
आंदोलन के दौरान गिरफ्तारियां और मुकदमे सैकड़ों नेताओं पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हुए,
हजारों कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी
विशेष अदालतों में वर्षों तक सुनवाई हुईं। वर्ष 2020 में विशेष सीबीआई अदालत द्वारा कई आरोपियों को बरी किया गया।
विनय कटियार ने कहा कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक ढांचा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है। उन्होंने कार्यकर्ताओं के योगदान को याद करते हुए कहा कि इतिहास में उनके संघर्ष को हमेशा याद रखा जाएगा।






