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Saturday, February 21, 2026

तहसील में डीएम अंजनी कुमार सिंह का औचक निरीक्षण, खाली पन्नों पर हस्ताक्षर मिलने से हड़कंप; जांच रिपोर्ट तलब

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मैनपुरी: घिरोर तहसील में शनिवार को जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह (DM Anjani Kumar Singh) के औचक निरीक्षण (surprise inspection) से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान न्यायालयों और विभिन्न अनुभागों की कार्यप्रणाली की गहन पड़ताल की गई, जिसमें कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। विशेष रूप से तहसीलदार न्यायालय की एक पत्रावली में खाली पन्नों पर पूर्व से किए गए हस्ताक्षर मिलने पर डीएम ने कड़ी नाराजगी जताई और मामले की जांच के आदेश दिए।

निरीक्षण के दौरान तहसीलदार कोर्ट में नीलेश कुमार बनाम जमादार सिंह धारा-34 से संबंधित पत्रावली का परीक्षण किया गया। जांच में पाया गया कि फाइल के कई खाली पन्नों पर पहले से हस्ताक्षर किए गए थे। जिलाधिकारी ने इसे अत्यंत गंभीर लापरवाही और संभावित दुरुपयोग की स्थिति बताते हुए कहा कि ऐसे हस्ताक्षरित खाली पन्नों का उपयोग कर किसी भी वाद को प्रभावित किया जा सकता है। उन्होंने तत्काल पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

डीएम ने न्यायालयों में लंबित वादों की भी समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी न्यायालय में तीन वर्ष से अधिक पुरानी पत्रावली लंबित नहीं रहनी चाहिए। उप जिलाधिकारी न्यायालय में चंद्र प्रताप बनाम आनंद प्रकाश भदौरिया, हरेंद्र सिंह बनाम अंगूरी देवी तथा प्रहलाद सिंह बनाम अशोक कुमार के मामलों की समीक्षा कर नियमानुसार शीघ्र निस्तारण के आदेश दिए गए। उन्होंने कहा कि न्यायिक कार्यों में अनावश्यक विलंब से आमजन को परेशानी होती है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

नजारत अनुभाग में भी कई गड़बड़ियां उजागर हुईं। रजिस्टर नंबर-04 में 24 लाख 79 हजार रुपये की धनराशि दर्ज पाई गई, जबकि उक्त राशि पहले ही बैंक में जमा हो चुकी थी, लेकिन रजिस्टर से इसे निरस्त नहीं किया गया था। इसके अतिरिक्त नीलामी और मत्स्य पट्टा आवंटन से प्राप्त धनराशि को लगभग एक माह की देरी से बैंक में जमा कराया गया था। स्थायी स्टॉक की प्रविष्टियां अस्थायी रजिस्टर में दर्ज किए जाने पर भी डीएम ने अप्रसन्नता जताई और संबंधित कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए।

संग्रह अनुभाग की समीक्षा में फरवरी माह की वसूली का स्पष्ट और अद्यतन विवरण उपलब्ध न कराए जाने पर जिलाधिकारी ने तहसीलदार को पूरी रिपोर्ट तैयार कर शीघ्र प्रस्तुत करने को कहा। वहीं, रजिस्ट्रार कानूनगो अनुभाग में परवानों की प्रविष्टि समय पर दर्ज करने तथा पुराने अभिलेखों को अभिलेखागार में जमा कराने के निर्देश दिए गए।

आपूर्ति विभाग की समीक्षा में पाया गया कि तहसील क्षेत्र की 72 कोटा दुकानों में से दो रिक्त चल रही हैं। जिलाधिकारी ने रिक्त दुकानों का शीघ्र आवंटन सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही 31,377 राशन कार्ड धारकों के सत्यापन की प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि शासकीय कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता सर्वोपरि है। किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण से तहसील प्रशासन में सक्रियता बढ़ी है और अधिकारियों को कार्यप्रणाली सुधारने के निर्देश दिए गए हैं।

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