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Saturday, February 21, 2026

शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि से 1.68 लाख कर्मियों और उनके परिवारों को मिली बड़ी राहत

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मानदेय वृद्धि से सरकार पर आएगा अनुमानित ₹1,480 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त वार्षिक वित्तीय भार

सरकार के इस अभूतपूर्व फैसले से शिक्षामित्र और अनुदेशकों में खुशी की लहर, सीएम योगी का जताया आभार

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े दो बड़े वर्गों, शिक्षामित्रों (Shiksha Mitras) और अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में उल्लेखनीय वृद्धि करके लगभग 1.68 लाख कर्मियों और उनके परिवारों को बड़ी राहत दी है। विधानसभा के बजट सत्र (budget session of assembly) में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की थी कि आगामी 1 अप्रैल 2026 से प्रदेश में कार्यरत शिक्षामित्रों को 18,000 रुपये तथा अंशकालिक अनुदेशकों को 17,000 रुपये प्रतिमाह (प्रति शैक्षिक सत्र 11 माह) मानदेय दिया जाएगा। इससे दोनों वर्गों को मिलाकर ₹1,480 करोड़ से अधिक (लगभग ₹1,480.43 करोड़) का अतिरिक्त वार्षिक वित्तीय भार आएगा। इसे राज्य और केंद्र सरकार द्वारा मिलकर वहन किया जाएगा। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि सरकार शिक्षा और उससे जुड़े मानव संसाधन को प्राथमिकता दे रही है।

शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा नया संबल

मानदेय वृद्धि से न केवल शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के जीवन स्तर में सुधार होगा, बल्कि विद्यालयों में उनकी कार्यक्षमता और मनोबल भी बढ़ेगा। इससे ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह निर्णय सामाजिक संवेदनशीलता और शिक्षा सुधार के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण माना जा रहा है। यह न केवल कर्मियों के लिए आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि परिषदीय विद्यालयों की शैक्षिक गुणवत्ता को सुदृढ़ करने की दिशा में भी बड़ा कदम माना जा रहा है।

शिक्षामित्रों की वर्षों की मांग हुई पूरी

प्रदेश में वर्तमान में 1,43,450 शिक्षामित्र कार्यरत हैं। अभी तक उन्हें 10,000 रुपये प्रतिमाह (11 माह) मानदेय दिया जा रहा था। नई घोषणा के अनुसार यह राशि बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रतिमाह कर दी गई है। इस तरह सरकार प्रति शिक्षामित्र वार्षिक अतिरिक्त व्यय के रूप में 88,000 रुपये व्यय करेगी, जबकि समस्त शिक्षा मित्रों पर यह वार्षिक व्यय लगभग ₹1,262.36 करोड़ होगा। यह राशि राज्य और केंद्र सरकार द्वारा वहन की जाएगी, जो शिक्षा क्षेत्र में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। गौरतलब है कि शिक्षामित्र योजना 1 जुलाई 2000 के शासनादेश के तहत लागू की गई थी, जिसका उद्देश्य परिषदीय विद्यालयों में 1:40 के अध्यापक-छात्र अनुपात को बनाए रखना था। शिक्षामित्र ग्राम शिक्षा समिति के प्रति उत्तरदायी होते हैं और प्रधानाध्यापक के मार्गदर्शन में शिक्षण कार्य करते हैं। समय-समय पर शिक्षा मित्रों के विभिन्न संगठनों द्वारा मानदेय वृद्धि की मांग की जाती रही है। वर्तमान घोषणा को लंबे समय से चली आ रही मांगों के समाधान के रूप में देखा जा रहा है।

अनुदेशकों को भी बड़ी राहत

इसी तरह, प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कला शिक्षा, स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा तथा कार्यानुभव शिक्षा के कुल 24,781 अंशकालिक अनुदेशक कार्यरत हैं। वर्तमान में उन्हें 9,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है। अब यह राशि बढ़ाकर 17,000 रुपये प्रतिमाह कर दी गई है। इस तरह प्रति अनुदेशक वार्षिक अतिरिक्त व्यय 88,000 रुपये और ओवरऑल वार्षिक अतिरिक्त वित्तीय व्यय लगभग ₹218.07 करोड़ होगा। वर्ष 2013 में 100 से अधिक छात्र संख्या वाले 13,769 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कला, स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा तथा कार्यानुभव विषयों के लिए अंशकालिक अनुदेशकों की संविदा आधारित नियुक्ति की गई थी। वर्ष 2022 में योगी सरकार ने उनके मानदेय को 7,000 से बढ़ाकर 9,000 रुपये किया था। अब इसे 17,000 रुपये प्रतिमाह किया जाना विद्यालयी शिक्षा में सह-शैक्षिक गतिविधियों को मजबूती देगा।

मानदेय वृद्धि से शिक्षामित्रों और अनुदेशकों में उत्साह, मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार

प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षामित्रों का मानदेय ₹10,000 से बढ़ाकर ₹18,000 किए जाने की घोषणा के बाद विभिन्न जनपदों में खुशी का माहौल है और इसे राहत भरा कदम बताते हुए शिक्षामित्रों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त किया है। मुरादाबाद की एक शिक्षामित्र ने कहा कि पिछले नौ वर्षों से ₹10,000 में गुजारा करना कठिन था, ऐसे में अप्रैल से ₹18,000 मानदेय मिलने की घोषणा से आर्थिक स्थिति में सुधार की उम्मीद जगी है। अयोध्या के सुखजीत सिंह ने इसे लंबे समय बाद समस्याओं पर गंभीरता से लिया गया निर्णय बताया, वहीं अन्य शिक्षामित्रों ने कहा कि वर्षों बाद उनकी परेशानियों पर ध्यान दिया गया है जिससे परिवारों को राहत मिलेगी और मनोबल बढ़ेगा।

शिक्षामित्र हिना कौसर ने कहा कि बढ़ती महंगाई के बीच ₹10,000 में घर चलाना चुनौतीपूर्ण था, अब राहत की उम्मीद है और वे पूरी मेहनत से बच्चों के भविष्य निर्माण में जुटी रहेंगी। संभल में उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र संगठन के जिला प्रवक्ता रविंद्र कुमार खारी ने कहा कि इस निर्णय से सरकार और शिक्षामित्रों के बीच संवाद मजबूत होगा। सुरभि गुप्ता और सरिता वार्ष्णेय ने भी इसे स्वागत योग्य कदम बताते हुए भविष्य में सहयोग की अपेक्षा जताई, जबकि रामपुर में तकनीकी अनुदेशक मोहित कुमार ने मानदेय वृद्धि को उत्साहवर्धक और प्रेरणादायक निर्णय बताया। शिक्षामित्र शोभा गुप्ता ने भी इसे बड़ी राहत करार देते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

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