फर्रुखाबाद। नगर पालिका परिषद जहां एक ओर शहर में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या से पूरी तरह निपट भी नहीं पाई थी, वहीं अब आवारा बंदरों का आतंक शहरवासियों के लिए नई मुसीबत बनकर सामने आ गया है। शहर के कई प्रमुख मोहल्लों में बंदरों की बढ़ती तादाद ने आमजन का जीना दुश्वार कर दिया है। खासकर रात के समय बंदरों की चहल-पहल से लोगों में भय और असुरक्षा की भावना गहराती जा रही है।
शहर के मदारवाड़ी, इस्माईलगंज, सनी सेठ वाली गली, नई बस्ती सहित कई अन्य इलाकों में बंदरों के झुंड खुलेआम घूमते देखे जा सकते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात 10 बजे से लेकर लगभग 12 बजे तक बंदरों की सक्रियता सबसे अधिक रहती है। छतों पर उछल-कूद, खिड़कियों और दरवाजों पर झपट्टा मारना, सूखते कपड़े और खाने-पीने की चीजें उठा ले जाना अब आम बात हो चुकी है।
नागरिकों का कहना है कि बंदरों का व्यवहार दिन-ब-दिन आक्रामक होता जा रहा है। कई स्थानों पर महिलाओं और बच्चों को बंदरों ने दौड़ा लिया, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। बुजुर्गों के लिए तो घर की छत या गली में निकलना भी जोखिम भरा हो गया है। लोग शाम ढलते ही दरवाजे और खिड़कियां बंद कर लेने को मजबूर हैं।
स्थानीय निवासी बताते हैं कि कई बार बंदरों ने पानी की टंकियों के ढक्कन खोल दिए, छतों पर रखे सामान को नुकसान पहुंचाया और बिजली के तारों पर झूलते हुए खतरे की स्थिति भी उत्पन्न कर दी। इससे दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है। अभिभावकों को डर है कि कहीं कोई बड़ा हादसा न हो जाए।
क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि कई बार नगर पालिका में शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है, लेकिन अब तक बंदरों को पकड़ने या उन्हें सुरक्षित स्थान पर भेजने के लिए कोई ठोस अभियान शुरू नहीं किया गया है। नागरिकों का कहना है कि समस्या दिन-ब-दिन विकराल होती जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग मौन साधे बैठा है।
नगर के सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है। बंदरों के हमले की आशंका से लोग मानसिक तनाव में जी रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहर में बढ़ते कूड़ा-कचरा, खुले में फेंका जाने वाला भोजन और अव्यवस्थित शहरीकरण भी बंदरों के बढ़ते जमावड़े का एक बड़ा कारण है। यदि सफाई व्यवस्था और कचरा प्रबंधन को सख्ती से लागू किया जाए तो समस्या में काफी हद तक कमी लाई जा सकती है।
फिलहाल शहरवासी नगर पालिका और प्रशासन से ठोस कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं। लोगों की मांग है कि बंदरों को पकड़ने के लिए विशेष टीम गठित की जाए, प्रभावित इलाकों का सर्वे कराया जाए और नियमित अभियान चलाकर शहर को इस आतंक से राहत दिलाई जाए। जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक फर्रुखाबाद के कई मोहल्लों में भय का यह वातावरण यूं ही बना रहने की आशंका है।





