फर्रुखाबाद। एक ओर नगर पालिका शहर को “क्लीन फर्रुखाबाद” बनाने के दावे करती नहीं थकती, दूसरी ओर हकीकत राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) के दोनों गेटों के बाहर सड़कों पर सड़ते कूड़े के ढेर के रूप में दिखाई दे रही है। शिक्षा के मंदिर के सामने फैली गंदगी ने पालिका की कार्यशैली की पोल खोल दी है।
जीआईसी के मुख्य और दूसरे प्रवेश द्वार के बाहर खुलेआम कूड़ा डाला जा रहा है। डस्टबिन का अता-पता नहीं, नियमित सफाई का कोई नामोनिशान नहीं। नतीजा—गेट के बाहर कूड़े के अंबार, बदबू का साम्राज्य और संक्रमण का खुला न्योता। प्रतिदिन सैकड़ों छात्र-छात्राएं इसी रास्ते से गुजरते हैं और गंदगी के बीच से होकर विद्यालय में प्रवेश करने को मजबूर हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक प्रमुख सरकारी विद्यालय के बाहर यह हाल है तो शहर के बाकी इलाकों की स्थिति क्या होगी? बदलते मौसम में वायरल, डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ रहा है। ऐसे में कूड़े के ढेर बच्चों के स्वास्थ्य पर सीधा हमला साबित हो सकते हैं। मक्खियां, मच्छर और आवारा पशु पूरे दिन कूड़े में मंडराते नजर आते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायतें कई बार की जा चुकी हैं, लेकिन कार्रवाई शून्य है। क्या नगर पालिका किसी बड़े हादसे या बीमारी फैलने का इंतजार कर रही है? बच्चों की सेहत से जुड़ा यह मामला गंभीर है, लेकिन जिम्मेदारों की चुप्पी और उदासीनता चिंता बढ़ा रही है।
अभिभावकों में आक्रोश है। उनका कहना है कि “स्वच्छता अभियान” केवल कागजों और फोटो सेशन तक सीमित है। जमीनी स्तर पर न तो डस्टबिन की व्यवस्था है, न नियमित कूड़ा उठान। विद्यालय के बाहर की यह तस्वीर शहर की प्रशासनिक संवेदनहीनता का प्रतीक बन चुकी है।
अब देखना यह है कि नगर पालिका कब जागेगी। क्या जीआईसी के गेटों के बाहर लगे कूड़े के पहाड़ हटेंगे, या फिर बच्चों की सेहत के साथ यह लापरवाही यूं ही जारी रहेगी? फिलहाल, शहर के इस प्रमुख शिक्षण संस्थान के बाहर स्वच्छता नहीं, बल्कि बदइंतजामी का राज कायम है।





