भरत चतुर्वेदी
मानव जीवन की मूल आवश्यकताओं में रोटी, कपड़ा और मकान का उल्लेख किया जाता है, लेकिन इन सब से पहले जो चीज़ सबसे जरूरी है, वह है शुद्ध हवा और स्वच्छ पानी। यदि सांस लेने की हवा दूषित हो और पीने का पानी असुरक्षित हो, तो कोई भी विकास, कोई भी आर्थिक प्रगति और कोई भी सुविधा जीवन को सुरक्षित नहीं रख सकती।
आज शहरीकरण और औद्योगीकरण की तेज़ रफ्तार ने पर्यावरण पर गहरा प्रभाव डाला है। वाहनों का धुआं, फैक्ट्रियों से निकलने वाली गैसें, निर्माण कार्यों की धूल और हरित क्षेत्र की कमी ने हवा को प्रदूषित कर दिया है। इसका परिणाम सांस की बीमारियों, एलर्जी, अस्थमा और हृदय रोगों के रूप में सामने आ रहा है। बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
इसी प्रकार पानी की स्थिति भी चिंताजनक होती जा रही है। नदियों और तालाबों में गिरता औद्योगिक कचरा, सीवेज का सीधा प्रवाह और प्लास्टिक प्रदूषण जलस्रोतों को दूषित कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई स्थानों पर लोग असुरक्षित पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे जलजनित रोग फैलते हैं। साफ पानी का अभाव सीधे स्वास्थ्य पर असर डालता है और परिवार की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित करता है।
शुद्ध हवा और पानी केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य का मुद्दा है। यदि वातावरण स्वच्छ होगा, तो अस्पतालों का बोझ कम होगा, दवाओं पर खर्च घटेगा और लोगों की कार्यक्षमता बढ़ेगी। यह सीधे-सीधे राष्ट्र की उत्पादकता से जुड़ा हुआ प्रश्न है।
समाधान केवल सरकार पर छोड़ देना पर्याप्त नहीं है। वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक का सीमित उपयोग, वर्षा जल संचयन और औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन जैसे कदम समाज और प्रशासन दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी हैं। शहरों में हरित पट्टियों का विकास, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना आवश्यक है।
ग्रामीण क्षेत्रों में तालाबों का पुनर्जीवन, जल स्रोतों की सफाई और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर पानी की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है। साथ ही, पर्यावरण शिक्षा को विद्यालय स्तर से ही मजबूत करना होगा, ताकि आने वाली पीढ़ी जागरूक और जिम्मेदार बने।
शुद्ध हवा और स्वच्छ पानी कोई विलासिता नहीं, बल्कि हर नागरिक का मूल अधिकार है। विकास की दौड़ में यदि हम प्रकृति को नुकसान पहुंचाते रहेंगे, तो उसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा। समय आ गया है कि हम प्रगति और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करें और यह सुनिश्चित करें कि हर व्यक्ति को सांस लेने के लिए स्वच्छ हवा और पीने के लिए सुरक्षित पानी उपलब्ध हो।क्योंकि अंततः जीवन का आधार धन नहीं, बल्कि प्रकृति की शुद्धता है।





