शरद कटियार
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और युवा आबादी वाले राज्य के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती रोजगार सृजन की है। हर वर्ष लाखों युवक-युवतियाँ शिक्षा पूरी कर रोजगार बाजार में प्रवेश करते हैं, लेकिन अवसर सीमित हैं। सरकारी नौकरियों की संख्या घटती जा रही है और निजी क्षेत्र अभी भी कुछ बड़े शहरों तक सीमित है। ऐसे में बेरोजगारी केवल आर्थिक समस्या नहीं रहती, बल्कि सामाजिक असंतोष, पलायन और असुरक्षा का कारण भी बनती है। यह समय पारंपरिक सोच से बाहर निकलकर उत्पादन आधारित, स्वदेशी और स्थानीय संसाधनों पर आधारित आर्थिक मॉडल को अपनाने का है।
रोजगार का स्थायी समाधान केवल भर्ती अभियानों से संभव नहीं है। जब तक राज्य में उत्पादन इकाइयों का विस्तार नहीं होगा, तब तक रोजगार के अवसर सीमित ही रहेंगे। उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत उसकी कृषि आधारित अर्थव्यवस्था, विशाल उपभोक्ता बाजार और श्रम शक्ति है। यदि खाद्य प्रसंस्करण, मसाला निर्माण, अचार, आटा-बेसन, साबुन, फिनायल जैसे दैनिक उपयोग के उत्पादों का निर्माण स्थानीय स्तर पर संगठित ढंग से किया जाए, तो हजारों छोटे उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं। ये उद्योग कम पूंजी में शुरू होते हैं और निरंतर मांग वाले उत्पादों पर आधारित होते हैं, जिससे बाजार का जोखिम अपेक्षाकृत कम रहता है।
ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में छोटे उत्पादन केंद्र स्थापित करने से दोहरा लाभ मिलता है। एक ओर युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलता है, दूसरी ओर महिलाओं को भी स्वरोजगार का अवसर मिलता है। इससे परिवार की आय बढ़ती है और सामाजिक स्थिरता मजबूत होती है। गांव से शहरों की ओर होने वाला पलायन कम होता है और स्थानीय अर्थव्यवस्था में धन का प्रवाह बना रहता है।
क्लस्टर आधारित औद्योगिक मॉडल इस दिशा में एक प्रभावी समाधान है। यदि एक जिले में कई छोटे उत्पादकों को एक साझा उत्पादन और पैकेजिंग ढांचे में जोड़ा जाए, तो मशीनरी की लागत कम होती है और गुणवत्ता में सुधार होता है। सामूहिक ब्रांडिंग और संगठित वितरण व्यवस्था छोटे उद्यमियों को बड़े बाजार तक पहुंच प्रदान करती है। इससे स्थानीय स्तर पर ही रोजगार की श्रृंखला विकसित होती है—कच्चे माल की आपूर्ति से लेकर उत्पादन, पैकेजिंग, परिवहन और बिक्री तक।
आज आवश्यकता इस बात की है कि रोजगार को केवल सरकारी जिम्मेदारी न माना जाए, बल्कि उत्पादन और उद्यमिता के माध्यम से सामूहिक प्रयास बनाया जाए। यदि प्रत्येक जिले में दर्जनों MSME इकाइयाँ स्थापित हों और उन्हें वित्तीय, तकनीकी एवं विपणन सहायता मिले, तो उत्तर प्रदेश रोजगार के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बन सकता है।
रोजगार सृजन केवल आर्थिक विकास का सूचक नहीं, बल्कि सामाजिक सम्मान और आत्मनिर्भरता का आधार है। जब स्थानीय स्तर पर उद्योग स्थापित होंगे, तब युवाओं को अवसर मिलेगा, परिवारों को स्थिर आय मिलेगी और राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। यही वह दिशा है, जो उत्तर प्रदेश को बेरोजगारी की चुनौती से बाहर निकालकर आत्मनिर्भरता और समृद्धि की ओर ले जा सकती है।

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