सात साल में 928 से 960 के पार पहुंचा लिंगानुपात
गाजियाबाद। जिले में चल रहे ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार’ अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग की सख्त निगरानी, अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई और लगातार जनजागरूकता के चलते सात वर्षों में लिंगानुपात 928 से बढ़कर 960 के पार पहुंच गया है। इसे वर्ष 2016 के बाद की सबसे बड़ी बढ़ोतरी माना जा रहा है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अखिलेश मोहन ने बताया कि वर्ष 2019 में जिले का लिंगानुपात 928 था, जो 2020 में 929, वर्ष 2023 में 933, वर्ष 2024 में 956 और वर्ष 2025 में 959 तक पहुंच गया। वर्ष 2026 के शुरुआती आंकड़ों में यह 960 के पार दर्ज किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार नियमित मॉनिटरिंग, डेटा विश्लेषण और सख्त कानूनी कार्रवाई का सीधा असर इन आंकड़ों में परिलक्षित हो रहा है।
जिले में अवैध रूप से संचालित अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। पिछले एक वर्ष में 20 से अधिक स्थानों पर छापेमारी की गई, जिनमें से पांच केंद्रों को मौके पर ही बंद करा दिया गया। विभाग का कहना है कि भ्रूण लिंग जांच जैसी अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत लगातार कार्रवाई की जा रही है।
लिंगानुपात सुधार में आशा कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित कराया जा रहा है। साथ ही बेटियों के महत्व को लेकर परिवारों को जागरूक किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान पर भी विशेष ध्यान दिया है। पिछले एक वर्ष में लगभग 450 महिलाओं को चिन्हित किया गया, जिनमें से 350 का सफलतापूर्वक सामान्य प्रसव कराया गया। इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में भी कमी आई है।
स्कूलों, सामुदायिक कार्यक्रमों और स्वास्थ्य शिविरों में “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे संदेशों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होने से ही यह बदलाव संभव हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि लिंगानुपात को संतुलित बनाए रखने के लिए नियमित निगरानी, जनजागरूकता अभियान और कानूनी सख्ती आगे भी जारी रहेगी।





