शमशाबाद! अचानक बदले मौसम के मिजाज ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। सुबह से ही आसमान में काले बादलों के छा जाने और तेज हवाएं चलने से ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल बन गया। किसानों को आशंका है कि यदि बेमौसम बारिश या ओलावृष्टि हुई तो उनकी मेहनत पर पानी फिर सकता है।
जानकारी के अनुसार शमशाबाद क्षेत्र के गांवों में इस समय विभिन्न फसलें पूरी तरह तैयार खड़ी हैं। कहीं आलू की खुदाई जोरों पर चल रही है तो कहीं सरसों की कटाई का काम शुरू होने वाला है। कई खेतों में सरसों की फसल पककर तैयार खड़ी है और किसान बस कटाई का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में मौसम का अचानक करवट लेना किसानों के लिए चिंता का कारण बन गया है।
गंगा कटरी क्षेत्र में भी किसानों ने बड़े पैमाने पर तंबाकू और सब्जियों की खेती की है। मेहनत और उम्मीदों के सहारे अमीरी के सपने देख रहे छोटे और गरीब किसानों के अरमानों पर उस समय पानी फिरता नजर आया जब बुधवार सुबह मौसम ने अपना रुख बदलना शुरू किया। पहले पूर्वी हवाएं चलीं, फिर आसमान में धीरे-धीरे बादल घिरने लगे और देखते ही देखते पूरा आसमान काले बादलों से ढक गया।
मौसम के इस बदलाव ने किसानों के दिलों की धड़कनें बढ़ा दीं। खेतों में बड़ी मात्रा में आलू तैयार है और खुदाई का कार्य तेजी से चल रहा है, लेकिन मंडियों में छाई मंदी ने पहले ही किसानों की कमर तोड़ रखी है। ऐसे में यदि बारिश हो गई तो खुदाई किया गया आलू खराब हो सकता है और खड़ी फसलें भी चौपट हो सकती हैं। कई किसान असमंजस में हैं कि आलू की खुदाई जारी रखें या मौसम साफ होने का इंतजार करें।
सरसों की फसल भी पूरी तरह तैयार है, बस कटाई और मड़ाई बाकी है। मंगलवार को जैसे ही मौसम बदला, किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ नजर आने लगीं। सुबह से दोपहर और फिर शाम तक आसमान में मंडराते काले बादल किसानों के दिल दहला रहे थे। हर किसी को यही डर सता रहा था कि कहीं बेमौसम बरसात, ओलावृष्टि या अन्य प्राकृतिक आपदा उनकी साल भर की मेहनत पर पानी न फेर दे।
गंगा कटरी क्षेत्र में सब्जी उत्पादक किसान भी मायूस दिखाई दिए। उनका कहना है कि मंडियों में पहले से ही कीमतें गिरने के कारण नुकसान उठाना पड़ रहा है। यदि अब मौसम ने साथ छोड़ दिया तो हालात और भी खराब हो जाएंगे।
दिन भर दहशत और आशंकाओं के बीच समय बीतता रहा। शाम ढलते-ढलते किसानों की नजरें अब रात की ओर टिक गई हैं। हर कोई यही दुआ कर रहा है कि मौसम साफ हो जाए और उनकी मेहनत सुरक्षित रहे। फिलहाल किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं और आने वाले समय को लेकर चिंता में डूबे हुए हैं।


