फर्रुखाबाद। जनपद के प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्र डॉ. राम मनोहर लोहिया चिकित्सालय में पिछले कई दिनों से एक्स-रे फिल्म मरीजों को उपलब्ध नहीं कराई जा रही है, जिससे मरीजों और चिकित्सकों दोनों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन द्वारा एक्स-रे की हार्ड कॉपी (फिल्म) देने के बजाय मरीजों के मोबाइल फोन में एक्स-रे की फोटो खींचकर दे दी जाती है, जिसे मरीज डॉक्टर को दिखाकर इलाज कराने को मजबूर हैं।
अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में मरीज एक्स-रे जांच के लिए पहुंचते हैं। लेकिन फिल्म उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को डिजिटल फोटो के सहारे ही काम चलाना पड़ रहा है। कई मरीजों का कहना है कि मोबाइल में खींची गई फोटो स्पष्ट नहीं होती, जिससे डॉक्टर को भी एक्स-रे ठीक से देखने में कठिनाई होती है और उपचार में देरी होती है।
सबसे अधिक परेशानी उन गरीब और बुजुर्ग मरीजों को हो रही है जिनके पास एंड्रॉयड मोबाइल फोन नहीं है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि यदि किसी मरीज के पास स्मार्टफोन ही नहीं है तो वह अपना एक्स-रे चिकित्सक को कैसे दिखाए? इस समस्या के समाधान के रूप में अस्पताल प्रशासन ने व्यवस्था बनाई है कि गरीब मरीजों के एक्स-रे व्हाट्सएप के माध्यम से मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) कार्यालय को भेजे जाते हैं। वहां से संबंधित मरीज का नाम और एक्स-रे संबंधित चिकित्सक को उपलब्ध कराया जाता है।
हालांकि यह व्यवस्था कागजों पर भले ही सुविधाजनक दिखाई दे, लेकिन जमीनी हकीकत में इससे समय की काफी बर्बादी हो रही है। पहले मरीज एक्स-रे कराता है, फिर उसकी फोटो खिंचवाई जाती है, उसके बाद व्हाट्सएप के माध्यम से भेजा जाता है और फिर चिकित्सक तक पहुंचाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय लग जाता है, जिससे ओपीडी में लंबी कतारें लग जाती हैं और मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।
चिकित्सकों का कहना है कि डिजिटल फोटो की गुणवत्ता कई बार संतोषजनक नहीं होती, जिससे सही निदान करने में कठिनाई आती है। इसके अलावा मरीजों की भीड़ और तकनीकी प्रक्रिया के कारण कार्य प्रभावित हो रहा है। अस्पताल में अव्यवस्था का आलम यह है कि मरीजों को एक काउंटर से दूसरे काउंटर तक भटकना पड़ रहा है।
मरीजों और तीमारदारों ने मांग की है कि अस्पताल प्रशासन जल्द से जल्द एक्स-रे फिल्म की आपूर्ति सुनिश्चित करे, ताकि मरीजों को समय पर और सुचारु रूप से उपचार मिल सके। वहीं स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों से भी इस मामले में हस्तक्षेप की अपेक्षा की जा रही है।





