मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने नौकरियों और शिक्षा में मुस्लिम समुदाय को दिए गए 5 प्रतिशत आरक्षण से संबंधित पुराने आदेश को आधिकारिक रूप से निरस्त कर दिया है। सामाजिक न्याय विभाग द्वारा जारी एक सरकारी संकल्प (जीआर) में स्पष्ट किया गया है कि विशेष पिछड़ा वर्ग (ए) के तहत मुस्लिम समूहों को दिए गए सभी पूर्व निर्णय अब रद्द माने जाएंगे।
यह आरक्षण पिछली भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस–राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) गठबंधन सरकार द्वारा अध्यादेश के माध्यम से लागू किया गया था। उस समय मराठा समुदाय को 16 प्रतिशत और मुस्लिम समुदाय को 5 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की गई थी। हालांकि, संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार अध्यादेश को छह सप्ताह के भीतर विधानसभा से पारित कराना आवश्यक होता है, लेकिन यह अध्यादेश सदन से पारित नहीं हो सका था।
विधानसभा से मंजूरी न मिलने के कारण यह आदेश कानूनी रूप से 10 वर्षों से अमान्य स्थिति में था। इसके बावजूद प्रशासनिक अभिलेखों में इसका उल्लेख बना हुआ था, जिसे अब औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया गया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार नए संकल्प का उद्देश्य आरक्षण से जुड़े अभिलेखों को स्पष्ट करना और कानूनी स्थिति को दुरुस्त करना है। इस फैसले के बाद राज्य में आरक्षण व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना जताई जा रही है।




