एटीएस अधिकारी बनकर बुजुर्ग दंपती को 14 दिन रखा बंधक; तीन जालसाज गिरफ्तार
लखनऊ। राजधानी में साइबर ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां जालसाजों ने खुद को एटीएस अधिकारी बताकर एक बुजुर्ग दंपती को 14 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा और गिरफ्तारी का डर दिखाकर उनसे 90 लाख रुपये ठग लिए। मामले का खुलासा होने पर लखनऊ साइबर क्राइम थाना की टीम ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से 18 लाख रुपये बरामद किए हैं और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
पीड़ित दंपती राकेश बाजपेयी और उनकी पत्नी वीना बाजपेयी, जो लखनऊ के आलमबाग क्षेत्र के निवासी हैं, को बीते 29 जनवरी को एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को एटीएस का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके बैंक खातों का इस्तेमाल संदिग्ध गतिविधियों में हुआ है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है। आरोपियों ने दंपती को गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाया और कहा कि जांच पूरी होने तक उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रहना होगा।
जालसाजों ने वीना बाजपेयी से सिग्नल एप डाउनलोड कराया और उसी के माध्यम से वीडियो कॉल पर बातचीत की। बातचीत के दौरान अजय प्रताप श्रीवास्तव नाम बताने वाले युवक ने खुद को एटीएस अधिकारी बताया और लगातार निगरानी में रखने का दावा किया। दंपती को घर से बाहर न निकलने, किसी से संपर्क न करने और फोन बंद न करने की सख्त हिदायत दी गई। इस दौरान बैंक खातों की जांच और गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर 29 जनवरी से 9 फरवरी के बीच दंपती से कुल 90 लाख रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर करा लिए गए।
जब आरोपियों ने 11 लाख रुपये और मांगे और रकम न दे पाने पर गाली-गलौज शुरू की, तब दंपती को शक हुआ। इसके बाद उन्होंने साहस जुटाकर साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और बैंक खातों की जांच के आधार पर धनराशि जिस खाते में ट्रांसफर की गई थी, उसका पता लगाया। जांच में खाता गोरखपुर जिले के पिपराइच क्षेत्र के निषाद चौराहा निवासी मयंक श्रीवास्तव के नाम पर पाया गया। इसके बाद पुलिस ने मयंक, इरशाद और आकाश को गिरफ्तार कर लिया।
डीसीपी साइबर क्राइम ने बताया कि आरोपियों ने संगठित तरीके से ठगी की वारदात को अंजाम दिया और बुजुर्ग दंपती को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर भय का माहौल बनाया। प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि गिरोह के अन्य सदस्य भी अलग-अलग राज्यों में सक्रिय हैं। पुलिस उनकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर खुद को पुलिस, एटीएस या किसी केंद्रीय एजेंसी का अधिकारी बताने वालों से सतर्क रहें। कोई भी जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के जरिए पैसे ट्रांसफर करने का निर्देश नहीं देती। ऐसी स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर या नजदीकी साइबर थाने से संपर्क करें।
यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि साइबर अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों को जाल में फंसा रहे हैं, खासकर बुजुर्गों को निशाना बना रहे हैं। सतर्कता और समय पर शिकायत ही ऐसे अपराधों से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।





