– नई रणनीति के चलते सदर से शाक्य प्रत्याशी उतारने पर फोकस
– जातीय और पिछले चुनावी आंकड़ों पर पार्टी की नजर
– बीजेपी विधायक की आम जनता से दूरी की बढ़ी नाराजगी का फ़ायदा उठाने की तैयारी
फर्रुखाबाद: सदर विधानसभा (Sadar Assembly) सीट को लेकर समाजवादी पार्टी ने आगामी चुनाव के लिए सीधी और स्पष्ट रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस बार सपा शाक्य बिरादरी से प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है। इसके पीछे साफ तौर पर जातीय समीकरण और पिछले चुनावों के आंकड़े प्रमुख आधार माने जा रहे हैं। साथी बीते लोकसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी को मिले भारी जन आधार के साथ ही बीते विधानसभा चुनाव में पार्टी समर्थन में लड़ी सुमन मौर्य को मिले करीब 70 हजार मत आकर्षण का केंद्र हैं।
सदर विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 3.40 से 3.60 लाख के बीच बताई जाती है। इनमें अनुमानित
लगभग 50 हजार शाक्य मतदाता
करीब 50 से 55 हजार मुस्लिम मतदाता, और सपा का पारंपरिक वोट बैंक (यादव और अन्य समर्थक वर्ग) लगभग 45 से 60 हजार
यदि ये वर्ग एकजुट रहते हैं तो सपा के पक्ष में करीब 1.40 लाख से अधिक वोटों का आधार बन सकता है। पार्टी इसी सामाजिक समीकरण को साधने की कोशिश में है।
पिछले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के समर्थन से सुमन मौर्य मैदान में उतरी थीं। वे महान दल के संस्थापक केशव मौर्य की पत्नी हैं। बताया जाता है कि उन्होंने बिना व्यापक तैयारी और सीधे नामांकन के बावजूद लगभग 70 हजार मत प्राप्त किए थे।
हालांकि भाजपा प्रत्याशी सुनील दत्त द्विवेदी ने उन्हें हराया था। उस समय प्रदेश में भाजपा के पक्ष में माहौल भी माना जा रहा था, जो इस चुनाव में देखने को नहीं मिलेगा साथ ही भाजपा विधायक सदर मेजर सुनील दत्त द्विवेदी आम जनमानस के बीच से भी दूरी बनाए रहते हैं, किसी के भी सुख-दुख में उनकी सहभागिता शून्य रहती है, जिस बात को लेकर आम मतदाता में बेहद नाराजगी है भाजपा कार्यकर्ता समेत तमाम उनके समर्थक बुरी तरह नाराज हैं जिसका सीधा फायदा यदि सपा का प्रत्याशी ठीक रहा तो समाजवादी पार्टी को मिलना तय है ।
हालिया लोकसभा चुनाव में सदर विधानसभा क्षेत्र में सपा को लगभग 50 हजार मतों की बढ़त मिलने की चर्चा है। यही आंकड़ा पार्टी के लिए उत्साह का कारण बना हुआ है। सपा मानती है कि यदि लोकसभा जैसी एकजुटता विधानसभा में भी बनी रही तो परिणाम अलग हो सकते हैं।
सदर सीट पर पूर्व विधायक विजय सिंह का प्रभाव अभी भी स्थानीय राजनीति में प्रभावी माना जाता है। उनका परिवार परंपरागत रूप से समाजवादी पार्टी के साथ रहा है। पार्टी को उम्मीद है कि यह समर्थन चुनाव में संगठनात्मक मजबूती देगा।
हालांकि पार्टी ने अभी तक संभावित शाक्य प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं की है। सूत्रों के अनुसार प्रत्याशी अपनी बिरादरी में प्रभावशाली और लोकप्रिय चेहरा होगा।
सदर विधानसभा में मुकाबला सीधा और कड़ा रहने के संकेत हैं। भाजपा अपने संगठन और मौजूदा स्थिति के आधार पर मजबूत मानी जा रही है, जबकि सपा जातीय और पारंपरिक वोट बैंक के सहारे रणनीति बना रही है।आगामी दिनों में प्रत्याशी की घोषणा के साथ ही इस सीट की राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।


