फर्रुखाबाद। जन सूचना अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी उपलब्ध न कराने पर सूचना आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए तत्कालीन खंड विकास अधिकारी कमालगंज पर 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से कुल 25,000 रुपये का अर्थदंड लगाया है। आयोग ने यह राशि संबंधित अधिकारी के वेतन से काटकर वसूलने के निर्देश जारी किए हैं।
मामले के अनुसार अधिवक्ता कौशल किशोर ने सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत खंड विकास अधिकारी से विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। निर्धारित समयावधि में सूचना उपलब्ध न कराए जाने पर उन्होंने प्रथम अपील दायर की। इसके बाद भी सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई तो प्रकरण सूचना आयोग तक पहुंचा।
आयोग द्वारा कई बार नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया। संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने के निर्देश भी दिए गए, लेकिन एक-दो अवसरों को छोड़ अधिकांश तिथियों पर न तो अधिकारी उपस्थित हुए और न ही संतोषजनक उत्तर प्रस्तुत किया गया। आयोग के आदेशों की अवहेलना करते हुए अपीलार्थी को मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं।
अपीलार्थी की पुनः शिकायत पर सुनवाई करते हुए आयोग ने इसे गंभीर लापरवाही और आदेश की अवमानना मानते हुए 250 रुपये प्रतिदिन की दर से अधिकतम 25,000 रुपये का दंड आरोपित कर दिया। साथ ही संबंधित विभाग को निर्देशित किया गया है कि उक्त राशि अधिकारी के वेतन से काटकर राजकोष में जमा कराई जाए।
सूचना आयोग की इस कार्रवाई को प्रशासनिक जवाबदेही की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि सूचना का अधिकार अधिनियम पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का सशक्त माध्यम है, और इसकी अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई आवश्यक है।




