लखनऊ| राजधानी में अवैध निर्माणों को लेकर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के नौ वर्तमान और सेवानिवृत्त अभियंताओं पर अवैध निर्माणों को संरक्षण देने तथा विभागीय नियमों की अनदेखी करने के आरोप में अनुशासनात्मक कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। शासन ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए कानपुर मंडल के आयुक्त को जांच अधिकारी नामित किया है।
शासन के विशेष सचिव महेंद्र प्रसाद भारती द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि नामित जांच अधिकारी सभी आरोपों की बिंदुवार जांच कर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेंगे। आरोप है कि संबंधित अभियंताओं ने अपने-अपने कार्यक्षेत्र में अवैध निर्माणों के विरुद्ध समय पर कार्रवाई नहीं की, बल्कि उन्हें संरक्षण दिया। इससे शहर का सुनियोजित विकास प्रभावित हुआ और प्राधिकरण की छवि पर भी सवाल खड़े हुए।
जिन अभियंताओं को आरोप पत्र दिया गया है उनमें अवर अभियंता विभोर श्रीवास्तव, श्रीराम चौहान, सहायक अभियंता सत्येंद्र कुमार, सेवानिवृत्त सहायक अभियंता एनएन चौबे, सेवानिवृत्त अवर अभियंता सुभाष चंद्र शर्मा, सहायक अभियंता शिवा सिंह, अवर अभियंता विपिन बिहारी राय, सुरेंद्र कुमार द्विवेदी तथा इम्तियाज अहमद शामिल हैं। इनमें कुछ अधिकारी वर्तमान में सेवा में हैं, जबकि कई सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
सूत्रों के अनुसार, शहर के विभिन्न इलाकों में बिना मानचित्र स्वीकृति के निर्माण, नियमों के विपरीत ऊंची इमारतें खड़ी करने तथा व्यावसायिक उपयोग के लिए आवासीय भवनों के रूपांतरण जैसे मामलों में अभियंताओं की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। इन शिकायतों के आधार पर शासन स्तर पर गंभीरता से संज्ञान लिया गया।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि अभियंताओं के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया लगभग एक माह पूर्व ही शुरू कर दी गई थी। अब शासन द्वारा जांच अधिकारी नियुक्त किए जाने के बाद विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया तेज होगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने पर संबंधित अभियंताओं के विरुद्ध कठोर कदम उठाए जा सकते हैं।
इस कार्रवाई को शहर में अवैध निर्माण पर अंकुश लगाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि सुनियोजित विकास से समझौता करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।





