ढाका। बांग्लादेश की राजनीति में लंबे समय से जारी अनिश्चितता के बाद अब सत्ता परिवर्तन का औपचारिक मार्ग प्रशस्त हो गया है। अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिन अधिकारियों और कर्मचारियों से विदाई लेकर नई सरकार के गठन की प्रक्रिया को अंतिम चरण तक पहुंचा दिया।
अपने संबोधन में यूनुस ने कहा कि यह समय देश के लोकतांत्रिक इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में प्रशासनिक तंत्र और सुरक्षा बलों की भूमिका की सराहना की तथा सभी के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
कार्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वातावरण भावुक रहा। यूनुस ने कर्मचारियों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की और सामूहिक छायाचित्र भी खिंचवाया। उन्होंने विश्वास जताया कि नई सरकार देश को स्थिरता और विकास की दिशा में आगे बढ़ाएगी।
इसी दिन बांग्लादेश सेना प्रमुख जनरल वेकर उज जमान ने भी शिष्टाचार भेंट कर चुनावों के दौरान समन्वय और सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा की। सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाए रखने पर बल दिया।
हाल ही में संपन्न 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिला है। पार्टी ने 297 में से 209 सीटों पर जीत दर्ज कर सरकार बनाने का दावा मजबूत किया है, जिसे जनता के निर्णायक जनादेश के रूप में देखा जा रहा है।
बीएनपी के अध्यक्ष तारिक रहमान आज प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी अगुवाई में नई सरकार प्रशासनिक सुधार, आर्थिक सुदृढ़ीकरण और क्षेत्रीय संतुलन पर विशेष ध्यान दे सकती है।
शपथ ग्रहण कार्यक्रम के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा सुबह नव-निर्वाचित सांसदों को शपथ दिलाई जाएगी। इसके बाद राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन सायंकाल प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। राजधानी ढाका में समारोह को लेकर सुरक्षा और प्रबंधन की व्यापक तैयारियां की गई हैं।
यूनुस के कार्यकाल के दौरान भारत-बांग्लादेश संबंधों में कुछ मुद्दों पर तनाव देखने को मिला था, विशेषकर अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर उठी चिंताओं के कारण। हालांकि कूटनीतिक संवाद जारी रहा और दोनों देशों ने रिश्तों को संतुलित बनाए रखने का प्रयास किया।
नई सरकार के गठन के साथ यह उम्मीद जताई जा रही है कि द्विपक्षीय संबंधों में नई ऊर्जा आएगी। व्यापार, सीमा प्रबंधन, जल संसाधन और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर सहयोग को और मजबूत किया जा सकता है।
बांग्लादेश अब एक नए राजनीतिक अध्याय की दहलीज पर खड़ा है। जनता की अपेक्षाएं ऊंची हैं और नई सरकार के सामने आर्थिक स्थिरता, सामाजिक सौहार्द तथा प्रशासनिक पारदर्शिता को सुनिश्चित करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। आने वाले दिन देश की दिशा और दशा तय करने में निर्णायक साबित होंगे।


