बुडापेस्ट। हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में सोमवार को अमेरिका और हंगरी के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच नागरिक परमाणु ऊर्जा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर की दिशा में महत्वपूर्ण सहमति बनी।
बैठक ऐसे समय में हुई है जब हंगरी में 12 अप्रैल को आम चुनाव प्रस्तावित हैं। वर्ष 2010 से सत्ता में वापसी के बाद यह चुनाव ऑर्बन के लिए अब तक की सबसे कठिन राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है। ऐसे में अमेरिका के साथ बढ़ती नजदीकी को चुनावी रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित नागरिक परमाणु समझौता ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी सहयोग को नई दिशा देगा। अमेरिका मध्य यूरोप के देशों के साथ रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी को मजबूत करने की नीति पर काम कर रहा है, ताकि क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोत विकसित किए जा सकें।
रुबियो इससे पहले जर्मनी में आयोजित सुरक्षा सम्मेलन में शामिल हुए थे और फिर स्लोवाकिया का दौरा किया। इन दौरों को यूरोप में अमेरिकी प्रभाव को सुदृढ़ करने और यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में सहयोगी देशों के साथ तालमेल बढ़ाने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।
ऑर्बन को यूरोपीय संघ में रूस के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख रखने वाले नेताओं में गिना जाता है। यूक्रेन युद्ध के बावजूद उनकी सरकार ने रूस से ऊर्जा आयात पूरी तरह बंद नहीं किया है। यूरोपीय संघ द्वारा रूसी ऊर्जा पर निर्भरता कम करने के प्रयासों के बीच यह रुख कई बार विवाद का कारण बना है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सोशल मीडिया पर ऑर्बन को “मजबूत और विजेता नेता” बताते हुए खुला समर्थन दिया था। ट्रंप की राष्ट्रवादी राजनीति और ऑर्बन की नीतियों के बीच समानता को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों में चर्चा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चुनाव से पहले अमेरिका-हंगरी सहयोग को औपचारिक रूप दिया जाता है, तो इससे ऑर्बन की घरेलू राजनीति को मजबूती मिल सकती है। ऊर्जा समझौता न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह रणनीतिक साझेदारी का संकेत भी देता है।
हंगरी में कंजरवेटिव पॉलिटिकल एक्शन कॉन्फ्रेंस जैसे कार्यक्रमों का आयोजन भी अंतरराष्ट्रीय दक्षिणपंथी नेतृत्व को जोड़ने के मंच के रूप में देखा जाता रहा है। चुनाव से पहले इस प्रकार की कूटनीतिक सक्रियता ऑर्बन की वैश्विक छवि को सुदृढ़ करने का प्रयास मानी जा रही है।
हालांकि विपक्षी दलों का कहना है कि विदेश नीति के मुद्दों को चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका तर्क है कि ऊर्जा और परमाणु सहयोग जैसे विषयों पर पारदर्शिता और संसद में व्यापक चर्चा आवश्यक है।
कुल मिलाकर, बुडापेस्ट में हुई यह मुलाकात केवल एक द्विपक्षीय वार्ता नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों और चुनावी राजनीति के संगम का प्रतीक बन गई है। आने वाले हफ्तों में यह स्पष्ट होगा कि यह समझौता किस दिशा में आगे बढ़ता है और इसका हंगरी की घरेलू राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।


