लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के सत्र के दौरान राज्य में पर्यटन विकास, बजट आवंटन और सुविधाओं के विस्तार को लेकर चर्चा हुई। समाजवादी पार्टी के एक विधायक ने सरकार से प्रश्न किया कि क्या प्रदेश में सभी धर्मों से जुड़े पर्यटन स्थलों के विकास के लिए समान रूप से धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि उत्तर प्रदेश में पर्यटन सुविधाओं का व्यापक स्तर पर विकास किया जाता है तो इससे न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
विधायक ने यह भी जानना चाहा कि अब तक सरकार ने किन-किन स्थलों को विकसित किया है, जिससे पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हो और प्रदेश राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकर्षण का केंद्र बन सके। उनका कहना था कि पर्यटन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थलों का भी समान रूप से संवर्धन आवश्यक है।
इस प्रश्न के उत्तर में पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने सदन को बताया कि प्रदेश सरकार बिना किसी जाति या धर्म के भेदभाव के पर्यटन विकास के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को 12 पर्यटन सर्किट में विभाजित कर योजनाबद्ध तरीके से विकास कार्य किए जा रहे हैं। इन सर्किटों के माध्यम से धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थलों को जोड़कर समग्र पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
मंत्री ने बताया कि सभी परियोजनाओं को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा किया जा रहा है, ताकि पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यटन क्षेत्र में निवेश बढ़ने से होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यापार को सीधा लाभ मिलेगा, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
सदन में हुई इस चर्चा के बाद पर्यटन विकास की दिशा में सरकार की रणनीति और उसके क्रियान्वयन पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह क्षेत्र प्रदेश की आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।






